Sakat Chauth Vrat 2026 Til ki vidhi: सकट चौथ का व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की मंगलकामना के लिए पूरे दिन व्रत करती हैं। कहीं-कहीं ये उपवास निर्जाला भी किया जाता है। आज के दिन भगवान गणेश, सकट माता और चंद्रमा की पूजा की जाती है। माताएं उनसे अपनी संतान की संकटों से रक्षा करने की प्रार्थना करती हैं। आज के दिन गणेश भगवान की पूजा में तिल और गुड़ से कुछ विधियां जरूर की जाती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने भगवान गणेश और सकट माता बच्चों को उन पर आने वाले संकटों से बचाती हैं। इनमें से एक है तिल का बकरा बनाकर काटना और दूसरी है तिल का पहाड़ बनाकर उसे काटना। आइए जानें आज के दिन विशेष रूप से की जाने वाली इन विधियों के बारे में
तिल का बकरा बनाकर काटने की विधि
सकट चौथ पर व्रत करने वाली माताएं शाम को गणेश भगवान और सकट माता की पूजा करती हैं। इस दिन सुबह व्रत का संकल्प लेने के बाद महिलाएं भगवान गणेश की विधिवत पूजा करती हैं। इसके बाद शाम को चंद्रोदय के समय मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बना कर या उनके चित्र की पूजा करती हैं। गणपति भगवान को धूप, दीप, अगरबत्ती और पुष्प अर्पित करती हैं। आज उन्हें केले और नारियल के प्रसाद का भोग लगाया जाता है। इस व्रत में तिल और गुड़ का भोग लगाना सबसे अच्छा माना जाता है। आज के दिन सकट चौथ की पूजा में 'बकरा' काटने की एक खास परंपरा भी निभाई जाती है। इस दिन तिल और गुड़ से बकरे का प्रतीकात्मक चित्र बनाया जाता है और फिर दूब की मदद से उसे काटा जाता है। दरअसल, प्राचीन समय में संकटों से मुक्ति पाने के लिए बकरे या किसी पशु की बलि देने की प्रथा थी। लेकिन वक्त के साथ ऐसी प्रथाओं का पतन हो गया। इसकी जगह अब तिल और गुड़ से बकरे का प्रतीकात्मक चित्र बनाया जाता है। फिर दूब घास को तलवार समझकर बकरे की गर्दन काटी जाती है.तिल और गुड़ की बलि से भगवान प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों का उद्धार करते हैं।
इसलिए पड़ा तिलकुटा चौथ नाम
सकट चौथ में तिल और गुड़ से एक और विधि निभाई जाती है। माताएं इस दिन पूजा में तिल का पहाड़ बनाती हैं, जिसे बाधा का प्रतीक माना जाता है। पूजा करते समय इसे चांदी के सिक्के से बीच में काटकर संतान के लिए मंगलकामना की जाती है। माना जाता है कि इसी परंपरा के कारण व्रत को 'तिल-कुटा' चौथ कहते हैं। इसमें तिल विशेष रूप से भोग लगाया जाता है।