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Pitru Paksha 2026: सितंबर या अक्टूबर कब से शुरू होंगे पितृ पक्ष? जानें सही तारीख और श्राद्ध पक्ष की सभी महत्वपूर्ण तिथियां

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर अमावस्या तिथि तक चलने वाली अवधि है, जिसमें अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। आइए जानें इस साल श्राद्ध पक्ष कब से शुरू हो रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 02, 2026 पर 8:53 PM
Pitru Paksha 2026: सितंबर या अक्टूबर कब से शुरू होंगे पितृ पक्ष? जानें सही तारीख और श्राद्ध पक्ष की सभी महत्वपूर्ण तिथियां
पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होने जा रहा है।

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की अवधि का विशेष महत्व है। यह लगभग 15 दिनों का समय होता है, जिसमें हम अपने परिवार के स्वर्गवासी हो चुके सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थन, श्राद्ध और तर्पण करते हैं। पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलता है। माना जाता है कि इस अवधि में पितरों की आत्माएं पृथ्वी पर अपने परिजनों के पास आती हैं। इस दौरान उनके नाम से श्राद्ध, तर्पण, और पिंडदान करने से उन्हें शांति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितृ पक्ष का पालन करने वाले इस अवधि में सात्विक जीवन जीते हैं। इस समय नया सामान खरीदना, शादी-विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक या शुभ कार्य और तामसिक भोजन वर्जित माने जाते हैं। साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत सितंबर महीने में होगी और इसका समापन अक्टूबर में सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं 2026 में पितृपक्ष कब से कब तक रहेगा और इस दौरान पड़ने वाली सभी महत्वपूर्ण श्राद्ध तिथियां कौन-कौन सी हैं।

कब से शुरू होगा पितृपक्ष 2026?

साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से होगी। इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध होगा। वहीं, पितृपक्ष का समापन 10 अक्तूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश उनका श्राद्ध तिथि पर नहीं हो पाता।

पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले प्रमुख कर्म

तर्पण : जल, तिल और कुशा से पितरों को जल अर्पित करना।

पिंडदान : चावल, जौ और तिल के पिंड बनाकर अर्पित करना।

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