भोगी पोंगल दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख और धूमधाम से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह चार दिन तक चलने वाले पोंगल पर्व का पहला दिन होता है और खास तौर पर तमिलनाडु तथा दुनिया भर में रहने वाले तमिल समुदाय इसे बड़े उत्साह और परंपरा के साथ मनाते हैं। भोगी पोंगल का मुख्य उद्देश्य पुराने को छोड़कर नए की शुरुआत करना माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों और आस-पड़ोस को साफ-सुथरा करते हैं, पुराने और बेकार सामान को बाहर निकालते हैं और अलाव जलाकर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की परंपरा निभाते हैं।
माना जाता है कि इससे जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी इसे परिवार और समुदाय के बीच मेल-जोल और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।
भगवान इंद्र की पूजा और नई शुरुआत
भोगी पोंगल का दिन वर्षा के देवता भगवान इंद्र को समर्पित होता है। इस दिन लोग अपने घरों से पुराने और बेकार सामान को बाहर निकालते हैं, अलाव जलाते हैं और घर-आसपास की साफ-सफाई करते हैं। माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
भोगी पोंगल 2026: तारीख और शुभ समय
भोगी पोंगल हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। ये हिंदू पंचांग के मार्गशीर्ष महीने का आखिरी दिन होता है और मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आता है। ये पर्व तमिलनाडु के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, भोगी संक्रांति का क्षण 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा।
भोगी पोंगल के प्रमुख रीति-रिवाज
इस दिन घरों को गेंदे के फूलों, आम के पत्तों और नई सजावटी चीजों से सजाया जाता है। महिलाएं चावल के आटे और लाल रंग से सुंदर कोलम बनाती हैं। इन डिजाइनों में कद्दू के फूल लगाए जाते हैं और बीच में गोबर के उपले रखकर उन पर दीये जलाए जाते हैं। कई घरों में ‘बोम्मला कोलुवु’ भी सजाया जाता है, जिसमें सीढ़ीनुमा तरीके से गुड़ियों को सजाया जाता है।
खास पकवान और खेती से जुड़ी परंपराएं
भोगी पोंगल के दिन बड़ी मात्रा में मिठाइयां बनाई जाती हैं और उन्हें परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के साथ बांटा जाता है। भोजन में नए चावल, गन्ना और हल्दी का विशेष उपयोग होता है। किसान अपने हल, कुदाल और अन्य कृषि औजारों की पूजा करते हैं। फसल कटाई से पहले इन औजारों पर कुमकुम और चंदन लगाकर सूर्य देव और धरती माता को अर्पित किया जाता है।
बच्चों से जुड़ी खास रस्में और मान्यताएं
भोगी पोंगल पर छोटे बच्चों पर ‘रेगी पल्लू’ यानी बेर, भीगी हुई चना दाल, फूलों की पंखुड़ियां, गन्ने के टुकड़े, गुड़ और सिक्के डाले जाते हैं। मान्यता है कि इससे बच्चों को नजर नहीं लगती और उन्हें अच्छा स्वास्थ्य व लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा ‘अरिसेलु अडुगुलु’ नामक रस्म भी होती है, जिसमें बच्चे के पहले कदम रखने की खुशी मनाई जाती है।