Sakat Chauth 2026:भगवान गणेश को समर्पित होता है सकट चौथ का व्रत, जानें साल की सबसे बड़ी चौथ व्रत की तारीख, मुहूर्त और महत्व

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का व्रत माताएं अपनी संतान के संकट दूर करने के लिए करती हैं। माह के महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आने वाली इस चौथ को इसे साल की सबसे बड़ी चौथ कहते हैं। इस दिन भगवान गणेश और संकटा माता और चंद्रमा की पूजा की जाती है। आइए जानें

अपडेटेड Dec 19, 2025 पर 8:06 PM
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यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इस दिन संकटा माता और चंद्रमा की पूजा की जाती है।

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का व्रत हर साल माघ के महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के संकटों को दूर करने से लिए व्रत करती हैं। ये व्रत संतान सुख की प्राप्ति की कामना से भी किया जाता है। इस व्रत को सकट चौथ के अलावा तिलकुटा चौथ, संकष्टि चतुर्थी और माघी चौथ व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत करने से सुख, सौभाग्य मिलता है और संतान की मुश्किलें दूर होती हैं। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इस दिन संकटा माता और चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश और संकटा माता की कथा सुनना शुभ माना जाता है। स्त्रियां इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत करती हैं और भगवान गणेश को तिल और गुड़ का भोग भी लगाती हैं। शाम को चंद्रमा निकलने के बाद उसके दर्शन और पूजा करती हैं। इसके बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। आइए जानें ये व्रत किस दिन किया जाएगा, पूजा का मुहूर्त और महत्व क्या है?

सकट चौथ व्रत की तारीख

पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 06 जनवरी को सुबह 08 बजकर 01 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 07 जनवरी को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगा। इस वजह से 06 जनवरी 2026 को सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा।

सकट चौथ महत्व और परंपरा

इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलती हैं। पूजा में तिल और गुड़ के लड्डू का भोग गणेश जी को लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ये भोग भगवान गणेश को अति प्रिय है। माघ के महीने में तिल का दान और सेवन स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दृष्टि से भी उत्तम माना जाता है।

भगवान गणेश से जुड़ा है यह व्रत


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की इसी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश ने अपने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी और अपनी बुद्धि का लोहा मनवाया था। इसी दिन उन्होंने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा कर यह सिद्ध किया था कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त ब्रह्मांड का वास है। भगवान गणेश 'विघ्नहर्ता' हैं, यानी दुखों को हरने वाले। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और संतान पर आने वाले सभी संकटों (सकट) को दूर कर देते हैं, इसीलिए इसे 'सकट चौथ' कहा जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश के जीवन का एक बड़ा संकट दूर हुआ था। माता पार्वती ने उन्हें अपने उबटन से बनाया था और भगवान शिव के साथ उनके युद्ध के बाद उन्हें हाथी का सिर लगाकर नया जीवन मिला था। यह दिन उनके पुनर्जन्म और मंगलकारी रूप की स्थापना का उत्सव भी है।

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