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Sheetala Ashtami 2026 Today: आज है बोसोड़ा, जानें कब से कब तक है शुभ मुहूर्त, भोग और पूजा विधि?

Sheetala Ashtami 2026 Today: आज माताएं शीतला अष्टमी का व्रत कर रही हैं। आज के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। माता शीतला को भी ठंडी चीजों और बासी भोजन का भोग लगाते हैं। आइए जानें आज पूजा का शुभ मुहूर्त कब से कब तक है और माता शीतला की पूजा करने की विधि क्या है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 11, 2026 पर 11:25 AM
Sheetala Ashtami 2026 Today: आज है बोसोड़ा, जानें कब से कब तक है शुभ मुहूर्त, भोग और पूजा विधि?
शीतला अष्टमी की पूजा चैत्र मास की अष्टमी तिथि की जाती है।

Sheetala Ashtami 2026 Today: आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज के दिन ही आरोग्य और शीतलता की देवी, माता शीतला की पूजा और व्रत किया जाता है। आज के दिन माताएं अपनी संतान की अच्छी सेहत और सुख-सौभाग्य के लिए माता शीतला की पूजा करती हैं और उन्हें एक दिन पहले बनी चीजों का भोग लगती हैं। इसीलिए आज के दिन को बासोड़ा पूजन भी कहते हैं। माना जाता है कि आज के दिन माता शीतला की पूरे विधि-विधान से पूजा करने पर बच्चों की चेचक, खसरा और अन्य त्वचा संबंधी बीमारियों से रक्षा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला को चेचक की अधिष्ठात्री के रूप में भी पूजा जाता है। आइए जानें आज के पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

शीतला अष्टमी पूजन मुहूर्त

शीतला अष्टमी की पूजा चैत्र मास की अष्टमी तिथि की जाती है। इस साल ये तिथि आज यानी 11 मार्च को है। शीतला अष्टमी की पूजा का मुहूर्त आज सुबह 6 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस बीच कभी भी माता शीतला की पूजा की जा सकती है।

माता शीतला को अर्पित करें ये भोग

माता शीतला की पूजा में लोग एक दिन पहले ही अलग-अलग क्षेत्रों में मीठे चावल, दही बड़े, रबड़ी और कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। अगले दिन माता शीतला को इन व्यंजनों का भोग लगाया जाता है और फिर उसी ठंडे प्रसाद को ग्रहण किया जाता है।

शीतला अष्टमी महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला को शीतलता प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इस समय धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगती है और शीतला अष्टमी के बाद मौसम और गर्म होने लगता है। इसलिए इस पर्व पर माता शीतला से प्रार्थना की जाती है कि उनकी कृपा से शरीर को ठंडक मिले और लोग स्वस्थ रहें। खासतौर पर चेचक जैसे संक्रामक रोग न हों, जो पहले इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलते थे। इसके कारण काफी बच्चों की जान भी चली जाती थी। इसलिए कई क्षेत्रों में लोग शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा करके उनसे इन रोगों से बचाव की प्रार्थना करते हैं।

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