Sheetl Ashtami 2026: शीतला माता को हिंदू धर्म में स्वच्छता और आरोग्य की देवी के रूप में पूजा जाता है। माता शीतला की पूजा, चेचक, खसरा या स्किन इनफेक्शन या अन्य संक्रामक रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। इनकी पूजा होली के आठ दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को की जाती है। हालांकि कहीं-कहीं शीतला सप्तमी मनाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियां माता शीतला को समर्पित हैं।
इनकी पूजा की विशेष बात ये है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलता है। सभी लोग बासी भोजन ग्रहण करते हैं और माता शीतला को भी बासी भोग ही अर्पित किया जाता है। इसीलिए इस व्रत को बासोड़ा व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस पूजा का वैज्ञानिक या चिकिस्कीय आधार कहता है कि भारत में इस समय मौसम बदल रहा होता है और गर्मियां शुरू हो रही होती हैं। ऐसे में शरीर के लिए अब गर्म खाना या गर्म चीजें सुपाच्य नहीं रह जाती हैं। इसलिए ठंडा और बासी खाना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन तंत्र को आराम पहुंचाता है। आइए जानें इस साल शीतला अष्टमी का व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें कौन सी 4 चीजें माता शीतला को भोग में अर्पित कर सकते हैं ?
इस साल शीतला अष्टमी यानी बसौड़ा 11 मार्च को है। होली के आठ दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है।
शीतला अष्टमी से जुड़ी मान्यताएं
11 मार्च को सुबह 06:35 बजे से शाम 18:27 बजे तक शीतला माता की पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप शीतला माता की पूजा कर सकते हैं।
बसोड़ा पर इन 4 चीजों का भोग लगाएं
हलवा- केसर, सूजी, चीनी और ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल कर आप हलवा तैयार कर सकते हैं। इसे आप शीतला माता को भोग में चढ़ा सकते हैं।
गुलगुले- गुड़ और आटे से बने गुलगुले, शीतला माता को बहुत पसंद हैं। इसे आप भोग में बना सकते हैं। प्रसाद में चढ़ाकर आप भी इसे खाएं।
आलू की सूखी सब्जी- बिना लहसुन-प्याज की सब्जी इस दिन बनाई जाती है। इसे जीरे से छौंक लगाकर बनाया जाता है।
मीठे चावल- एक दिन पहले गुड़, केसर, और सूखे मेवे डालकर मीठे चावल बनाए और बसोड़ा वाले दिन इसे खाएं।