Sheetla Saptami 2026 Today: चैत्र का महीना कई प्रमुख व्रत और त्योहारों के लिए जाना जाता है। इसमें माह के पहले दिन जहां रंगों का पर्व होली मनाया जाता है, वहीं पांचवें दिन रंग पंचमी और सातवें दिन यानी चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी को शीतला सप्तमी होती है। ये तिथि आरोग्य, स्वच्छता और शीतलता की देवी माता शीतला को समर्पित होती है। वैसे तो, चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियां माता शीतला को समर्पित है। इस पर्व को बासोड़ा पूजन के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये साल का वो खास दिन होता है जिसमें लोग ताजा नहीं बासी खाना खाते और माता शीतला को भोग लगाते हैं। देश के कई राज्यों में ये पूजन क्षेत्रीय विविधताओं के साथ मनाया जाता है। इसमें सप्तमी के दिन भक्त दोपहर या शाम के समय खाना बनाते हैं और अष्टमी के दिन इसी का भोग माता शीतला को अर्पित करने के बाद खुद भी ग्रहण करते हैं। आइए जानें इस पर्व का क्या महत्व है और इसमें खाना बनाने का क्या है शुभ समय ?
साल 2026 में शीतला सर्तमी कब है?
इस साल यानी साल 2026 में 10 मार्च, मंगलवार के दिन शीतला सप्तमी मनाई जाएगी।
शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त
शीतला सप्तमी के दिन पूजा का समय सुबह 6 बजकर 4 मिनट से शाम में 5 बजकर 56 मिनट है।
शीतला अष्टमी के दिन ताजा खाना नहीं बनाया जाता। इस व्रत में एक दिन पहले यानी सप्तमी की रात या शाम को बनाकर रखा खाना ही अगले दिन ठंडा (बासी) प्रसाद के रूप में खाया जाता है। इसलिए खाना बनाने का शुभ समय सप्तमी के दिन दोपहर या शाम से लेकर रात तक माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को बीमारियों से रक्षा का आशीर्वाद देती हैं।
शीतला माता के लिए जरूर बनाएं ये भोग
शीतला सप्तमी के दिन मां शीतला को खास मीठे चावलों का भोग चढ़ाया जाता है। ये चावल गुड़ या गन्ने के रस को मिलाकर बनाए जाते हैं। इस भोग को रात में ही बनाकर रख लिया जाता है और फिर शीतला सप्तमी की पूजा के बाद इसे घर में सभी सदस्यों को खिलाया जाता है। बता दें कि इस दिन घर में सुबह के समय कुछ भी नहीं बनाया जाता है। जो लोग व्रत रहते हैं वो इन्हीं मीठे चावल को खाकर ही व्रत रखते हैं।
हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इस व्रत को रखने से संतानों की सेहत अच्छी बनी रहती है। मान्यता है इस दिन व्रत रखने से परिवार के सभी सदस्यों को गर्मी के मौसम के दौरान होने वाली बीमारियों जैसे चेचक, बुखार, फोड़े-फुंसी आदि से मुक्ति मिल जाती है। महिलाएं शीतला माता का व्रत बच्चों की अच्छी सेहत के लिए रखती हैं। इतना ही नहीं इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।