Shukra Pradosh 2026 Katha: हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है और इसमें प्रदोष काल यानी शाम के समय पूजा करने का विधान है। पूरे साल आने वाले सभी 24 प्रदोष व्रत में से अधिक मास में आने वाला प्रदोष दुर्लभ और पुण्य प्रदान करने वाला माना जाता है। अधिक मास का प्रदोष व्रत तीन साल में आता है। जैसे कल ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का व्रत किया जाएगा। शुक्रवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करते समय प्रदोष व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए। ऐसा करने व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
