भारतीय धार्मिक आस्थाओं और लोकविश्वासों में कई ऐसे स्थान हैं जहां आज भी लोगों को ‘चिरंजीवी’ हनुमान जी के साक्षात् रहने की अनुभूति होती है। भारत के कोने-कोने में ऐसे रहस्यमयी स्थल, पर्वत और मंदिर हैं जहां भक्त यह मानते हैं कि संकटमोचन हनुमान खुद मौजूद रहते हैं और भक्तों की मनोकामना सुनते हैं। इन जगहों से सीधे जुड़े किस्से, पौराणिक घटनाएं और भक्तों के अनुभव हमारी श्रद्धा को और भी गहरा करते हैं।
गंधमादन पर्वत जिसे अक्सर हिमालय क्षेत्र में बद्रीनाथ और मानसरोवर के बीच स्थित बताया जाता है, हनुमान जी का सबसे रहस्यमय निवास स्थल माना जाता है। तमिलनाडु के रामेश्वरम के पास मौजूद इस पर्वत से जुड़ी मान्यता है कि यहीं से हनुमान ने विशाल समुद्र लांघकर लंका में छलांग लगाई थी। प्रमाण के तौर पर यहां एक मंदर की शिला पर उनके ‘चरणचिन्ह’ आज भी देखे जा सकते हैं। इसी पर्वत को लेकर लोककथाएं हैं कि कलियुग के दौर में हनुमान जी यहीं अव्यक्त रूप में तप में लीन हैं, जहां अब भी साधु-संत रहस्यमयी ऊर्जा का अनुभव करते हैं और कभी-कभी भक्तों को संकट के समय उनकी उपस्थिति भी महसूस होती है।
हिमालय का भी हनुमान जी से गहरा संबंध बताया गया है। हिमाचल प्रदेश के ‘हनुमान टिब्बा’ और उत्तराखंड की अनेक गुफाओं में साधु-संत मानते हैं कि हनुमान आज भी ध्यानस्थ अवस्था में मौजूद हैं। माणा गांव के करीब के क्षेत्रों को भी गंधमादन का हिस्सा माना जाता है, जहां स्थानीय लोगों तथा तीर्थयात्रियों को कई बार रहस्यमय शक्तियों का अनुभव हुआ है।
तिब्बत में कैलाश पर्वत के पास स्थित मानसरोवर झील केवल भगवान शिव ही नहीं बल्कि चिरंजीवी हनुमान और अन्य अमर आत्माओं का ऊर्जा केंद्र भी मानी जाती है। मान्यता है कि समय-समय पर यहां चिरंजीवी आत्माएं आती हैं, और साधकों को यहां गहन शांति के साथ अदृश्य उपस्थिति का अद्वितीय अनुभव होता है।
चित्रकूट का ‘हनुमान धारा’ ऐसा स्थान है जहां आज भी भक्त हनुमान की कृपा और ऊर्जा को अपने आसपास महसूस करते हैं। पौराणिक मान्यता है कि सीता हरण के दौरान यहाँ हनुमान जी ने अपनी अग्निज्वाला शांत की थी।
रामेश्वरम के पंचमुखी हनुमान मंदिर में पांच मुखों के साथ हनुमान की पूजा साकार होती है। कथा है कि महिरावण वध के समय हनुमान ने पांच मुख धारण किए थे । वराह, नरसिंह, गरुड़, हयग्रीव और स्वयं हनुमान। यह मंदिर बुरी शक्तियों से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
अवधपुरी अयोध्या के ‘हनुमान गढ़ी’ मंदिर को लेकर मान्यता है कि रामनगरी की रक्षा के लिए स्वयं हनुमान जी सदैव यहां निवास करते हैं। यहां भक्तों की प्रार्थनाओं का असर और जय-जयकार की गूंज हमेशा सुनाई देती है।
क्यों माने जाते हैं हनुमान चिरंजीवी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सीता और भगवान राम ने हनुमान जी को ‘चिरंजीवी’ यानी अंतहीन आयु व अमरता का वरदान दिया था। श्रीराम ने आज्ञा दी कि कलियुग में जब-जब सत्पुरुष संकट में आएंगे, वे हर बार उनकी सहायता के लिए धरती पर रहेंगे। इसीलिए कलियुग में भी, माना जाता है कि जहां-जहां श्रीराम का नाम लिया जाता है, वहां-वहां हनुमान जी की उपस्थिति स्वतः हो जाती है।
भारत के यह स्थल केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि श्रद्धा और आत्मिक अनुभव का केंद्र हैं। विज्ञान इनके रहस्यों को शायद ना सुझा पाए, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए गंधमादन पर्वत, हिमालय, मानसरोवर, चित्रकूट, पंचमुखी मंदिर या हनुमान गढ़ी इन सभी जगहों की ऊर्जा और अनुभूतियां हमेशा प्रेरणादायी हैं।