Varuthini Ekadashi: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। ये तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है और हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है। माना जाता है कि एकादशी व्रत को सच्ची श्रद्धा और विधि विधान से करने वाले भक्तों पर भगवान श्री हरि का हाथ सदा बना रहता है। उनके आशीर्वाद से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और वैकुंठ में स्थान मिलता है।
एकादशी व्रत जितना महत्वपूर्ण है उतने सख्त इसके नियम हैं और जरा सी लापरवाही से आपके पूरे दिन के व्रत का फल नष्ट हो सकता है। हर माह की तरह वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को भी व्रत किया जाएगा। इस माह की पहली एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहते हैं। इस साल वरूथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को किया जाएगा। आइए जानें इस दिन पूजा का क्या मुहूर्त है और व्रत के दिन क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
एकादशी तिथि प्रारंभ- 13 अप्रैल 2026, रात 01:16 बजे
पारण की तारीख- मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
पारण का समय- सुबह 06:54 बजे से 08:31 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि पर माता तुलसी, भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में इस दिन भूल से भी तुलसी में जल अर्पित न हीं करना चाहिए, अन्यथा इससे तुलसी माता का व्रत खंडित हो सकता है।
एकादशी पर तुलसी दल तोड़ने से बचना चाहिए। ऐसे में आप पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख सकते हैं। एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही, इस दिन पूजा में काले रंग के कपड़े न पहनें।
भगवान विष्णु के भोग में जरूर रखें तुलसी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए एकादशी पर उनके भोग में तुलसी दल शामिल करना न भूलें। एकादशी पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। इससे विष्णु जी की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरूथिनी एकादशी पर दान करने से 10,000 वर्ष की तपस्या के समान फल मिलता है। ऐसे में इस दिन पर आप अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, जल, वस्त्र, तिल और गाय का दान कर सकते हैं।