Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। हिंदू वर्ष में आने वाली 24 एकादशी तिथियों में से एक विजया एकादशी का व्रत भी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन सच्ची आस्था और भक्ती के साथ भगवान विष्णु को याद करने से भक्त की हर मुराद पूरी होती है और मुश्किलों पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले फाल्गुन कृष्ण एकादशी का व्रत किया था। उन्हें अपने शत्रु पर विजय मिली थी। विजया एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक बल मिलता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं
पंचांग के अनुसार, फागुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे से होगी और इसका समापन 13 फरवरी को दोपहर 2:26 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 13 फरवरी को विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
विजया एकादशी की पूजा विधि
विजया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल में भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित लगाएं। उन्हें चंदन, पीले वस्त्र अर्पित करें और पीले रंग की मिठाई या गुड़-चना का भोग लगाएं। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप करें।
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवाय
विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
अयोध्या के पंडित सीताराम दास ने लोकल 18 को विजया एकादशी के महत्व के बारे में बताया। उनके अनुसार, विजया एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने भी लंका विजय से पहले विजया एकादशी का व्रत रखा था। इसके फलस्वरूप उन्होंने समुद्र तट को पार कर विजय प्राप्त की। इसी कारण इस एकादशी को ‘विजया’ कहा गया है।