Vivah Panchami 2025: जिस दिन हुआ था राम-सीता का विवाह, उस दिन शादी करने से क्यों कतराते हैं लोग? जानें वजह

Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी के दिन भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था। यह दिन हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष को पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल ये दिन 25 नवंबर के दिन मनाया जाएगा। लेकिन बहुत लोग इस दिन विवाह करना नहीं चाहते। जानिए वजह

अपडेटेड Nov 06, 2025 पर 4:51 PM
Story continues below Advertisement
विवाह पंचमी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी का दिन साल के बहुत शुभ दिनों में से एक माना जाता है। त्रेता युग में इसी दिन भगवान श्री राम ने माता सीता के साथ विवाह किया था। इस तरह ये दिन राम-सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में हर साल मनाया जाता है। विवाह पंचमी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल विवाह पंचमी 25 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन लोग पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ भगवान राम और जनकनंदिनी सीता की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सीता-राम की विधि विधान से पूजा करने से अविवाहित लोगों के विवाह के योग बनते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन, एक अन्य मान्यता के अनुसार जो लोग इस दिन शादी करते हैं उन्हें बहुत कष्टों का सामना करना पड़ाता है। जिस तरह राम-सीता साथ हो कर भी सुखी नहीं रह पाए, उसी तरह इस दिन शादी करने वाले जोड़े भी नहीं रह पाते हैं। आइए जानें इसके पीछा क्या करण है ?

25 नवंबर को है विवाह पंचमी

विवाह पंचमी हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान राम और माता सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में पूरे देश में, खासकर अयोध्या और नेपाल के जनकपुर में, बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह दिन 25 नवंबर, दिन मंगलवार को पड़ रहा है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ : 24 नवंबर 2025 को रात 09:22 बजे हो रहा है

पंचमी तिथि का समापन : 25 नवंबर 2025 को रात 10:56 बजे होगा

उदया तिथि के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।


इस दिन विवाह क्यों नहीं किया जाता है?

विवाह पंचमी के दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य न करने के पीछे कोई शास्त्रीय कारण नहीं है। लोग इस दिन शादी करना अच्छा नहीं मानते हैं, इसलिए ये लोक मान्यता का मामला है।

दुखों में बीता था माता सीता का वैवाहिक जीवन

भगवान राम और माता सीता का विवाह एक आदर्श विवाह माना जाता है, लेकिन विवाह के बाद उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। विवाह के तुरंत बाद उन्हें 14 वर्षों का वनवास झेलना पड़ा। वनवास के दौरान माता सीता का अपहरण हुआ और उन्हें अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। अयोध्या लौटने के बाद भी उन्हें लोक-निंदा के कारण परित्याग सहना पड़ा और अपने जीवन के अंतिम क्षणों में उन्हें धरती में समाना पड़ा। यह मान्यता खासतौर से मिथिलांचल (नेपाल) और बिहार के कुछ क्षेत्रों में अधिक प्रचलित है।

Utpanna Ekadashi 2025: आज से शुरू हुआ अगहन, इस दिन होगी माह की पहली उत्पन्ना एकादशी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।