Arjun Rajput journey: पिता बेचते हैं छोले-कुलचे, बेटे का U-19 क्रिकेट टीम में हुआ सिलेक्शन, पढ़ें- अर्जुन राजपूत की प्रेरक कहानी
Arjun Rajput journey: इंडिया U-19 क्रिकेट के लिए अब अर्जुन राजपूत भी खेलेंगे। जालंधर की सड़कों पर रेहड़ी लगाकर परिवार चलाने वाले होटी राम ने कर्ज और संघर्ष के बीच बेटे का सपना जिंदा रखा। अब अर्जुन राजपूत का चयन भारत अंडर-19 टीम में हुआ है
Arjun Rajput journey: छोले-कुलचे बेचने वाले का बेटा इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल हुआ है
Arjun Rajput journey: बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) की जूनियर क्रिकेट समिति ने श्रीलंका के आगामी दौरे के लिए भारत की पुरुष अंडर-19 टीम की घोषणा कर दी है। इस दौरे में तीन वनडे और दो मल्टी डे मैच शामिल हैं। टीम की अगुआई यशबर्धन सिंह चौहान करेंगे। जबकि लक्ष्य रायचंदानी को उप-कप्तान नियुक्त किया गया। भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के बेटे अन्वय द्रविड़ भी वनडे टीम में शामिल हैं। एक वनडे टीम में विकेटकीपर रजत बघेल और अन्वय द्रविड़ होंगे। जबकि बहु-दिवसीय मुकाबलों के लिए विकेटकीपिंग के लिए मानव कृष्णा और आर्यन संदेश सकपाल को चुना गया है।
छोले-कुलचे बेचने वाले के बेटे का भी हुआ चयन
इंडिया U-19 क्रिकेट के लिए अब अर्जुन राजपूत भी खेलेंगे। जालंधर की सड़कों पर रेहड़ी लगाकर परिवार चलाने वाले होटी राम ने कर्ज और संघर्ष के बीच बेटे का सपना जिंदा रखा। अब अर्जुन राजपूत का चयन भारत अंडर-19 टीम में हुआ है। जालंधर के रहने वाले होटी राम के लिए जिंदगी कभी आसान नहीं रही।
सालों तक उन्होंने चने-कुलचे की रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण किया। हर सुबह जल्दी उठना, खाना तैयार करना और घंटों सड़क किनारे खड़े होकर ग्राहकों का इंतजार करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कमाई सीमित थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। करीब एक साल पहले उन्होंने रेहड़ी बंद कर एक छोटी बेकरी शुरू की, जहां अब वे कुलचे तैयार कर उनकी डिलीवरी करते हैं।
आर्थिक तंगी परिवार की सबसे बड़ी चुनौती
अर्जुन राजपूत ने बताया कि आर्थिक तंगी उनकी परिवार की सबसे बड़ी चुनौती थी। बच्चों की पढ़ाई, स्कूल फीस और घर के खर्चों को पूरा करने के लिए होटी राम को कई बार कर्ज लेना पड़ा। कई ऐसे महीने आए जब फीस समय पर भरना मुश्किल हो गया। कई बार रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मदद लेनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की एजुकेशन और सपनों के साथ कभी समझौता नहीं किया।
7 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया
इन्हीं संघर्षों के बीच उनके बेटे अर्जुन राजपूत ने सात साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया। उन्होंने जालंधर के हरभजन सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट में ट्रेनिंग लेना शुरू किया और धीरे-धीरे अपने खेल को निखारा। अर्जुन का सपना एक दिन भारत के लिए खेलने का था। हालांकि, कुछ वर्षों बाद यह अकादमी बंद हो गई, जिससे उनके क्रिकेट करियर पर संकट के बादल मंडराने लगे।
लेकिन अर्जुन की प्रतिभा को पहचानने वाले लोगों ने उनका साथ नहीं छोड़ा। कोच विक्रम सिद्धू, जो पहले से अर्जुन को ट्रेनिंग दे रहे थे, आगे आए और उनकी मदद की। उन्होंने अर्जुन का दाखिला एक प्रतिष्ठित स्कूल में करवाया और स्कूल मैनेजमेंट से फीस माफ करने का अनुरोध किया। स्कूल ने भी उनकी प्रतिभा को देखते हुए यह मांग स्वीकार कर ली। इससे अर्जुन अपनी पढ़ाई और क्रिकेट दोनों पर बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के ध्यान दे सके।
पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा
अर्जुन का कहना है कि उनके परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने पिता को रोज सुबह मेहनत करते देखा और अपनी मां को सीमित संसाधनों में घर संभालते हुए देखा। परिवार की परेशानियों का एहसास होने के बावजूद कभी किसी ने उनसे क्रिकेट छोड़ने या नौकरी करने के लिए नहीं कहा।
अर्जुन ने एक इंटरव्यू में कहा, "मेरे परिवार ने कभी मुझे अपनी परेशानियां महसूस नहीं होने दीं। लेकिन मैं उनके त्याग और संघर्ष को समझता था। उन्होंने हमेशा मुझे सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान देने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए कहा।"
पिता का बढ़ाते हैं हाथ
आज भी होटी राम अपनी बेकरी से कुलचों की डिलीवरी करते हैं। परिवार की आर्थिक चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। लेकिन अब उनके चेहरे पर संतोष और गर्व साफ दिखाई देता है। उनका बेटा अर्जुन राजपूत भारत अंडर-19 टीम के लिए श्रीलंका दौरे पर जाने वाला है।
यह कहानी सिर्फ एक युवा क्रिकेटर की सफलता की नहीं। बल्कि उस पिता के संघर्ष, त्याग और विश्वास की भी है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने बेटे के सपनों को जिंदा रखा। सड़क किनारे चने-कुलचे बेचने से लेकर बेटे का नाम भारत की अंडर-19 टीम में देखने तक का यह सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अर्जुन के बारे में बड़ी बातें
जालंधर के होटी राम वर्षों तक चने-कुलचे की रेहड़ी लगाकर परिवार चलाते रहे। बाद में उन्होंने एक छोटी बेकरी शुरू की।
आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और क्रिकेट का सपना नहीं टूटने दिया। फीस भरने के लिए उन्हें कई बार कर्ज लेना पड़ा।
उनके बेटे अर्जुन राजपूत ने 7 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया और जालंधर के हरभजन सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट में ट्रेनिंग लिया।
अकादमी बंद होने के बाद कोच विक्रम सिद्धू ने उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने में मदद की और एक स्कूल में दाखिला दिलाकर फीस माफ करवाने में सहयोग किया।
परिवार के त्याग और अपनी मेहनत के दम पर अर्जुन का चयन इंडिया अंडर-19 टीम में श्रीलंका दौरे के लिए हो गया।
आज भी होटी राम अपनी बेकरी से कुलचे की डिलीवरी करते हैं। लेकिन बेटे के भारत का प्रतिनिधित्व करने के सपने के सच होने से उनकी वर्षों की मेहनत सफल होती दिखाई दे रही है।