दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने सोमवार को आईपीएल के इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर अपनी नाराजगी जताई है। वहीं रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने भी इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर सवाल उठाए हैं। बता दें आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम साल 2023 में लागू किया गया था और फिलहाल 2027 तक जारी रहने वाला है। इस नियम के तहत टीम मैच के दौरान कभी भी अपनी प्लेइंग इलेवन बदल सकती है और पांच सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों में से किसी एक को शामिल कर सकती है।
आईपीएल 2026 में इम्पैक्ट प्लेयर के नियम पर अपनी राय पूछे जाने पर भारतीय टी20 टीम के उप-कप्तान ने भी खुलकर बात की। उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान के रूप में अपने दूसरे सीजन से पहले इस मुद्दे पर अपनी राय शेयर की है।
दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने कहा, "मुझे ये नियम पसंद नहीं है क्योंकि मैं खुद ऑलराउंडर हूं (हंसते हुए)। पहले हम इस रोल के लिए ऑलराउंडर को चुनते थे, लेकिन अब टीम मैनेजमेंट किसी खास बैटर या बॉलर के साथ जाता है और कहता है कि ऑलराउंडर की जरूरत ही क्या है?" अक्षर ने आगे कहा, "मैं खुद ऑलराउंडर हूं, इसलिए मुझे यह नियम पसंद नहीं है। लेकिन नियम तो नियम होते हैं, हमें उन्हें मानना ही पड़ता है। फिर भी, निजी तौर पर मुझे यह सही नहीं लगता।"
फिर मैंने नियमित रूप से गेंदबाजी शुरू की
अक्षर पटेल ने बताया कि पिछले आईपीएल सीजन में उन्होंने 204 गेंदें डाली थीं, जो उससे पहले वाले सीजन की 264 गेंदों से कम थीं। अक्षर पटेल ने आगे कहा, "मैंने ज्यादा गेंदबाजी नहीं की, लेकिन ये इम्पैक्ट प्लेयर की वजह से नहीं था। चैंपियंस ट्रॉफी के बाद मेरी स्पिन वाली उंगली कट गई थी और गेंद की सीम से यह और खराब हो गई। बाद में ये गहरा कट बन गया, जिससे मैं गेंद पर सही से पकड़ और घुमाव नहीं दे पा रहा था।" अक्षर ने कहा, "इसी वजह से मैं सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही गेंदबाजी कर रहा था और अपनी उंगली का इलाज करा रहा था। करीब सात मैच के बाद हालत सुधरी, फिर मैंने नियमित रूप से गेंदबाजी शुरू की।"
रोहित-हार्दिक कर चुके हैं आलोचना
दिल्ली कैपिटल्स को पहला आईपीएल खिताब की तलाश में मैदान पर उतरेगी। वहीं इम्पैक्ट प्लेयर के नियम पर 2024 में रोहित शर्मा ने कहा था कि उन्हें यह रणनीतिक नियम पसंद नहीं है, क्योंकि इससे भारतीय क्रिकेट में ऑलराउंडर खिलाड़ियों के ग्रोथ पर असर पड़ता है। वहीं अगले सीजन में हार्दिक पांड्या ने भी कहा कि इस नियम के चलते टीम में ऑलराउंडर चुनना मुश्किल हो गया है, क्योंकि अब खिलाड़ी को बैटिंग और बॉलिंग दोनों में बराबर अच्छा होना जरूरी हो गया है।