भारत और पाकिस्तान के बीच हाईवोल्टेज मुकाबला 14 सितंबर को खेला जाएगा। ये मुकाबला दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों ही टीमें अपना पिछला मुकाबला जीतकर आई है। वहीं इस मुकाबले से पहले इस मैच को लेकर काफी विवाद हो रहा है। दुबई में रविवार 14 सितंबर को मैच खेला तो जाएगा, लेकिन बीसीसीआई ने इस बार मैच से दूरी बना ली है। इसी वजह से उनके इस कदम को लोग "इन्विंसिबल बॉयकॉट" कह रहे हैं।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल टूर्नामेंट का मेजबान भारत है, लेकिन अब तक बीसीसीआई का कोई वरिष्ठ अधिकारी दुबई नहीं पहुंचा है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक टेंशन के कारण एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) ने मुकाबलों को संयुक्त अरब अमीरात शिफ्ट कर दिया।
बीसीसीआई की ओर से नहीं हुआ कोई शामिल
बीसीसीआई अधिकारियों का दुबई न जाना जनता की इमोशन के अनुरूप माना जा रहा है। हाल ही में देशभर में कई प्रशंसक समूहों ने मैच के बहिष्कार की मुहिम चलाई और बोर्ड से इस मैच को सिम्बोलिक सपोर्ट न देने की मांग की। हालांकि, एसीसी प्रतिनिधि के तौर पर अनुभवी प्रशासक राजीव शुक्ला की आ सकते हैं। लेकिन बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और आईसीसी अध्यक्ष जय शाह के इसमें शामिल होने की संभावना नहीं जताई जा रही है।
इस बार मैच की एक्साईमेट कम
इस बार बीसीसीआई का रवैया पहले से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। चैंपियंस ट्रॉफी में जब भारत-पाकिस्तान का मैच इसी मैदान पर हुआ था, तब स्टेडियम में फैन्स के साथ बीसीसीआई के अधिकारी और राज्य संघों के बड़े पदाधिकारी भी मौजूद थे। भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता हमेशा खेल से आगे निकलकर दोनों देशों के रिश्तों की झलक दिखाती रही है। लेकिन इस बार रविवार को होने वाला मुकाबला, जिसे आमतौर पर "क्रिकेट का सबसे बड़ा शो" कहा जाता है, अपने पुराने रोमांच से खाली नजर आ रहा है। टिकटों की बिक्री धीमी रही है और सोशल मीडिया पर चर्चा एक्साईटमेंट से ज्यादा नाराजगी में बदल चुकी है, कई लोग मैच का प्रसारण न देखने यानी उसका बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं।
इस बार नहीं दिखेगा ये नजारा
इस साल बीसीसीआई का रुख पहले से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान जब भारत-पाकिस्तान का मैच इसी मैदान पर खेला गया था, तब स्टेडियम प्रशंसकों और बीसीसीआई अधिकारियों के साथ राज्य संघों के बड़े पदाधिकारियों से खचाखच भरा था। लेकिन इस बार उनकी अनुपस्थिति साफ दिखा रही है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल का असर क्रिकेट पर भी पड़ रहा है।