Video: डी गुकेश से करारी हार के बाद बौखलाए दुनिया के नंबर वन चेस खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन, मेज पर मारा मुक्का

दुनिया के नंबर एक शतंरज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन (Magnus Carlsen) को भारत के युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश (D Gukesh) ने उनके ही घर में करारी हार दी है। डी गुकेश से इस हार के बाद कार्लसन इतने हताश नजर आए कि उन्होंने गुस्से में मेज पर मुक्का मार दिया। ये मुकाबला नॉर्वे शतरंज ओपन के छठे राउंड का था।

अपडेटेड Jun 02, 2025 पर 1:46 PM
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D Gukesh beats Magnus Carlsen: डी गुकेश ने पहली बार क्लासिलकल गेम में मैग्नस कार्लसन को हराया है

दुनिया के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन (Magnus Carlsen) को भारत के युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश (D Gukesh) ने उनके ही घर में करारी हार दी है। डी गुकेश से इस हार के बाद कार्लसन इतने हताश नजर आए कि उन्होंने गुस्से में मेज पर मुक्का मार दिया। ये मुकाबला नॉर्वे शतरंज ओपन के छठे राउंड का था। कहा जा रहा है कि यह कार्लसन के करियर की अब तक सबसे करारी हार में से एक है।

पिछले 14 सालों से शतंरज की दुनिया में बादशाहत रखने वाले कार्लसन को इतनी खराब तरीके से शायद ही पहले कभी हारते देखा गया हो। डी गुकेश और मैग्नस कार्लसन के बीच यह मुकाबला नार्वे के स्टावेंगर में हुआ। 34 वर्षीय कार्लसन मुकाबले की शुरुआत में डी गुकेश पर हावी थे। खेल की शुरुआती और मिडिल स्टेज में उन्होंने गुकेश को लगातार दबाव में रखा। लेकिन जैसे ही खेल एंडगेम की ओर बढ़ा, समय के दबाव में कार्लसन से हुई एक चूक ने पूरा मैच पलट दिया।

17 वर्षीय गुकेश ने सफेद मोहरों से खेलते हुए दबाव में भी संयम बनाए रखा। और फिर जैसे ही कार्लसन से चूक हुई, उन्होंने उसे भुनाते हुए खेल को जीत में तब्दील कर दिया। यह पहली बार था जब गुकेश ने क्लासिकल टाइम कंट्रोल गेम में कार्लसन को हराया है, भी उनके ही देश नॉर्वे में, उनके घरेलू दर्शकों के सामने।


इस हार से कार्लसन खुद काफी हक्के-बक्के नजर आए। उन्होंने गुस्से में मेज पर हाथ पटक डाला। वहीं दूसरी तरफ, गुकेश काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी जीत में से एक को बेहद संयम के साथ स्वीकार किया।

खेल के बाद गुकेश ने लॉबी में अपने कोच ग्रेजगोर्ज गाजेव्स्की से जोरदार मुट्ठी टकराकर अपनी खुशी जाहिर की, जिसे इंग्लिश में फिस्ट बंप कहते हैं। गुकेश के कोच ने बताया कि 'यह उनका अब तक की सबसे मजबूत फिस्ट बंप था।'

खेल के बाद गुकेश बेहद उत्साहित नजर आए और लॉबी में अपने कोच ग्रेजगोर्ज गाजेव्स्की से जोरदार मुट्ठी टकराकर अपनी खुशी जाहिर की। कोच ने कहा, “यह उनका अब तक की सबसे मजबूत फिस्ट बंप थी।”

लगातार दूसरे भारतीय ने कार्लसन को हराया

यह लगातार दूसरा साल है जब किसी भारतीय युवा ने कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में हराया है। पिछले साल यह कारनामा आर प्रग्गनानंदा ने किया था, और इस साल डी गुकेश ने। टूर्नामेंट के पहले राउंड में कार्लसन ने गुकेश को काले मोहरों से हराया था, लेकिन गुकेश ने इसका जोरदार बदला ले लिया।

"कार्सलन के करियर की सबसे पेनफुल हार" — सुसन पोलगर

शतरंज की दिग्गज ग्रैंडमास्टर सुसन पोलगर ने इस हार को कार्लसन के करियर की सबसे पेनफुल यानी दर्दनाक हारों में से एक बताया। उन्होंने कहा, "कार्लसन बहुत कम बार क्लासिकल शतरंज में हारते हैं और इतनी बड़ी गलती तो उनसे और भी कम होती है। वह जीत की स्थिति में थे और उनके पास समय भी ज्यादा था, लेकिन गुकेश ने हार नहीं मानी और दबाव बनाकर अंत में जीत हासिल की।"

यह जीत न केवल गुकेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि वर्ल्ड चेस में भारत की मजबूत उपस्थिति का भी एक सबूत है।

यह हार कार्लसन के लिए सिर्फ स्कोरबोर्ड की हार नहीं थी, बल्कि उनके आत्मविश्वास और बड़बोलेपन को भी गहरा झटका था। खासकर इसलिए क्योंकि कुछ दिन पहले ही उन्होंने गुकेश को पहले राउंड में सफेद मोहरों से मात दी थी और फिर इंस्टाग्राम पर एक क्रिप्टिक पोस्ट किया था: "You come at the king, you best not miss." यानी अगर आप राजा के पास जाते हैं, तो आपको चूकना नहीं चाहिए। कई लोगों ने बताया कि इस पोस्ट के जरिए कार्लसन ने खुद को इशारों में क्लासिकल चेस गेम का किंग यानी राजा कहा था। लेकिन अब गुकेश के हाथों इस हार के बाद उनका यह घमंड भी टूट गया है।

कार्लसन इससे पहले कई बार क्लासिकल टाइम कंट्रोल गेम में गुकेश की क्षमता और उनकी एकाग्रता पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इस मैच में खुद कार्लसन दबाव में आकर भारी गलती कर बैठे, जिसका फायदा गुकेश ने पूरी चतुराई से उठाया।

यह मैच और भी खास था क्योंकि यह कार्लसन का क्लासिकल शतरंज में इस साल पहला बड़ा मुकाबला था। इससे पहले 2023 में उन्होंने अपने पांचवीं वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने के बाद खिताब का बचाव करने से इनकार किया था। उन्होंने कुछ समय के लिए क्लासिकल शतरंज से दूरी बना ली थी। इस बीच गुकेश दुनिया के सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बने। इसके बाद गुकेश और कार्लसन के बीच यह पहला बड़ा मुकाबला था। डी गुकेश की यह जीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।

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