नए साल में iPhone 17 की बिक्री की रफ्तार बनाए रखने के लिए Apple ने फाइनेंसिंग पर जोर बढ़ा दिया है। फेस्टिव सीजन के बाद सप्लाई चेन सामान्य होने के साथ कंपनी कम ब्याज और नो-कॉस्ट EMI जैसी स्कीम्स ला रही है, ताकि प्रीमियम खरीदार जुड़े रहें।
नए साल में iPhone 17 की बिक्री की रफ्तार बनाए रखने के लिए Apple ने फाइनेंसिंग पर जोर बढ़ा दिया है। फेस्टिव सीजन के बाद सप्लाई चेन सामान्य होने के साथ कंपनी कम ब्याज और नो-कॉस्ट EMI जैसी स्कीम्स ला रही है, ताकि प्रीमियम खरीदार जुड़े रहें।
कई स्मार्टफोन ब्रांड कंपोनेंट्स की ऊंची लागत और कमजोर रुपये के चलते कीमतें बढ़ा रहे हैं। वहीं, Apple 24 महीने तक की नो-कॉस्ट और लो-इंटरेस्ट EMI देकर कीमतों का दबाव कम करने की कोशिश कर रही है।
यह कदम भारत में तेजी से बढ़े ग्रे-मार्केट iPhone कारोबार पर Apple की हालिया सख्ती के बाद आया है। कंपनी ने मेनलाइन रिटेलर्स को चेतावनी दी थी कि वे नए बिके iPhone, खासकर iPhone 17, को विदेशी सिम कार्ड के साथ एक्टिवेट न करें।

क्यों प्रभावित हुई थी iPhone 17 की उपलब्धता
चेतावनी ऐसे वक्त आई, जब iPhone 17 भारतीय बाजार से लगभग गायब हो गया था। बड़ी संख्या में डिवाइस रूस, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे हाई-मार्जिन बाजारों में डायवर्ट हो रही थीं, जिससे घरेलू सप्लाई पर असर पड़ा।
रिटेलर्स के मुताबिक, घरेलू बाजार के लिए सप्लाई अब सुधर चुकी है। Apple ने डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए एक्सपोर्ट सीमित किए हैं ताकि लोकल ग्राहकों को प्राथमिकता मिले। 24 महीने की नो-कॉस्ट EMI में iPhone 17 की मासिक किस्त करीब 3,000–3,500 रुपये बैठ रही है, जिससे यह ज्यादा लोगों की पहुंच में आता है।
कैशबैक घटने के बाद नई स्कीम
नवंबर के अंत में iPhone 17 सीरीज पर बैंक कैशबैक 6,000 रुपये से घटाकर 1,000 रुपये कर दिया गया था, जिससे आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च बढ़ा। इसके बाद Apple ने नई फाइनेंसिंग स्कीम्स पेश कीं।
14 से 31 जनवरी तक लागू ऑफर में 9, 12, 18 और 24 महीने की जीरो-इंटरेस्ट EMI शामिल हैं। 20% या 33% डाउन पेमेंट के साथ 12-16 महीने की नो-कॉस्ट EMI के विकल्प भी हैं। कुछ योजनाओं में 4% से 17% तक की लो-इंटरेस्ट दरें भी मिल रही हैं, जो टेन्योर पर निर्भर होंगी।

Bajaj, HDFC जैसे लेंडर्स का सपोर्ट
इन स्कीम्स को Bajaj Finance, HDB Financial Services, HDFC Bank (Pine Labs के जरिए कार्डलेस), IDFC First Bank, ICICI Bank और TVS Credit जैसे लेंडर्स सपोर्ट कर रहे हैं। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन- दोनों चैनलों पर उपलब्धता बढ़ती है।
एनालिस्ट्स का कहना है कि ऊंची कीमतों और कमजोर डिस्क्रेशनरी खर्च के माहौल में प्रीमियम स्मार्टफोन कंपनियां लंबी अवधि की EMI स्कीम्स पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं।
भारत में Apple की आगे की ग्रोथ
आने वाले तीन-चार साल में Apple से डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। iPhone की मजबूत मांग के साथ MacBook और iPad इकोसिस्टम का विस्तार इसमें सहायक रहेगा। ऑफलाइन रिटेल नेटवर्क, प्रीमियम रीसेलर्स की बढ़ती संख्या और मैन्युफैक्चरिंग-सप्लाई चेन के विस्तार से यह रफ्तार और मजबूत हो सकती है।
RoC फाइलिंग के मुताबिक, भारत में Apple का रेवेन्यू FY25 में 18.26% बढ़कर 79,378 करोड़ रुपये पहुंचा। नेट प्रॉफिट 16.4% बढ़कर 3,196 करोड़ रुपये रहा। एनालिस्ट्स को FY26 और FY27 में भी इसी रेंज की ग्रोथ की उम्मीद है।
भारत में iPhone की वॉल्यूम हिस्सेदारी करीब 9% और वैल्यू शेयर 28% है। एनालिस्ट्स मानते हैं कि Apple की अगली ग्रोथ टियर-2, टियर-3 और छोटे शहरों में मांग गहराने से आएगी।
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