किसी टीवी में गूगल असिस्टेंट या एलेक्सा है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह हैंड्स-फ्री है
कई बजट टीवी में आजकल 'AI पिक्चर' या 'AI साउंड' मोड का जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है। अधिकतर सस्ते मॉडलों में ये केवल प्रीसेट सेटिंग्स होती हैं न की कोई असली AI। ये मोड कॉन्ट्रास्ट या आवाज को थोड़ा-बहुत बढ़ाते है, लेकिन इससे किसी जादू की उम्मीद न करें।
एक ब्रांड का 50-इंच का टीवी दूसरे ब्रांड के 50-इंच के टीवी से ज्यादा मोटे किनारों वाला हो सकता है। अगर आपके लिए टीवी का लुक भी मायने रखता है, तो केवल स्क्रीन साइज ही नहीं, बल्कि टीवी के डायमेंशन भी देखें। क्योंकि स्लिम बेजल वाला टीवी ज्यादा बड़ा और जबरदस्त हो सकता है।
कई स्मार्ट टीवी चालू होने या ऐप्स लोड करने में काफी धीमे हो सकते हैं। ये देरी समय के साथ बढ़ती जाती है। टीवी के बूट होने का समय और ऐप स्विच करने की स्पीड बहुत जरूरी है। इसे लेने से पहले आजमाने की कोशिश करें या उन रिव्यूज को देखें जो विशेष रूप से टीवी के परफॉरमेंस की स्पीड का जिक्र करते है।
रिटेल स्टोर आमतौर पर टीवी की ब्राइटनेस को बढ़ाकर और लाइटिंग करके रखते है ताकि वे आकर्षक दिखें। यह जरूरी नहीं कि स्टोर में जैसा टीवी दिख रहा था वैसा ही घर पर भी दिखे। ब्राइटनेस के लेवल को चेक करें।
किसी टीवी में गूगल असिस्टेंट या एलेक्सा है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह हैंड्स-फ्री है। कई टीवी केवल रिमोट माइक के जरिए काम करते है। अगर आप इको-स्टाइल कंट्रोल चाहते हैं, लेने से पहले इसका ध्यान रखें।
किसी टीवी में HDR10 होने का दावा किया जा सकता है, लेकिन पर्याप्त पीक ब्राइटनेस के बिना HDR कंटेंट काफी फीका दिखेगा। केवल लेबल होने का मतलब यह नहीं है कि HDR परफॉरमेंस अच्छी होगी।