लैपटॉप और कंप्यूटर की बढ़ेंगी कीमतें, इस साल 35% तक हो सकती हैं महंगी, देखें पूरी डिटेल

लैपटॉप या डेस्कटॉप खरीदने की प्लानिंग कर रहे कंज्यूमर को इस साल 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि प्रोसेसर और GPU सहित प्रमुख कंपोनेंट्स की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खरीददारी प्रभावित हो रही है।

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 2:03 PM
Story continues below Advertisement
लैपटॉप और कंप्यूटर की बढ़ेंगी कीमतें, इस साल 35% तक हो सकती हैं महंगी

लैपटॉप या डेस्कटॉप खरीदने की प्लानिंग कर रहे खरीदारों को इस साल 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि प्रोसेसर और GPU सहित प्रमुख कंपोनेंट्स की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खरीददारी प्रभावित हो रही है। एनालिस्ट्स के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से DDR RAM की आसमान छूती कीमतों और एंट्री-लेवल Intel प्रोसेसर की कमी के कारण हो रही है।

मार्केट ट्रैकर्स IDC और काउंटरपॉइंट ने Moneycontrol को बताया कि 2025 में PC की रिकॉर्ड शिपमेंट के बाद, इस साल वॉल्यूम में 8% तक की गिरावट आने की संभावना है।

IDC के अनुसार, डेस्कटॉप, नोटबुक और वर्कस्टेशन सहित भारतीय PC मार्केट ने 2025 में अपना सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें 15.9 मिलियन यूनिट की शिपमेंट हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.2% अधिक है।


यह पहली बार था जब सालाना शिपमेंट 15 मिलियन यूनिट से अधिक हो गई, जो COVID के कारण FY21 और FY22 में आए पीक को भी पार कर दिया।

साल का समापन मजबूत रहा, दिसंबर तिमाही में शिपमेंट 41 लाख यूनिट तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 18.5% प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

HP अभी भी पहले स्थान पर बना हुआ है, उसके बाद Lenovo, Dell, Acer और Asus का स्थान है, और सभी प्रमुख कंपनियों ने 2025 में शिपमेंट में वृद्धि दर्ज की है।

उर्जा और पेट्रोकेमिकल के महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट से सेमीकंडक्टर निर्माण की लागत बढ़ सकती है, जिससे कंपोनेंट्स और चिप्स की कीमत और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक रुकावट का प्रभाव तुरंत नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष और देरी से दिखाई देगा।

बढ़ती कीमतें

कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमते अब डिवाइ की कीमतों को बढ़ाना शुरू कर रही है। RAM की कीमत पहले ही 2.5 से 3 गुना बढ़ चुकी है, जिससे लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में अब तक लगभग 10-12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

IDC India के सीनियर मार्केट एनालिस्ट भरत शेनॉय ने कहा कि मार्च में 8-10 प्रतिशत की और वृद्धि की उम्मीद है, और अगले कुछ महीनों में कंपोनेंट की बढ़ती कीमतों के चलते 10 प्रतिशत और बढ़ने की संभावना है।

शेनॉय ने कहा कि जो डिवाइस पहले 30,000-35,000 रुपये की रेंज में बिकते थे, उनकी कीमत अब 45,000 रुपये के करीब पहुंच रही है, जिससे स्टूडेंट्स, होम यूजर्स और पहली बार खरीदने वालों के लिए अपग्रेड करना मुश्किल हो रहा है।

रिटेलर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतें अगले छह से सात तिमाहियों तक बढ़ती रह सकती हैं और 2027 की दूसरी छमाही तक कम नहीं हो सकती हैं, जिससे कुछ ग्राहक जल्दी खरीदारी करने पर मजबूर हैं।

एंटरप्राइज और छोटे बिजनेस भी बाद में अधिक कीमत चुकाने से बचने के लिए अपग्रेड साइकिल को आगे बढ़ा रहे हैं।

बढ़ती कीमते, घटती मांग

हालांकि, जल्दी खरीदारी से साल की पहली छमाही में बाजार स्थिर रह सकता है, लेकिन IDC का अनुमान है कि बढ़ती कीमतों के कारण खरीदारी में कमी आने से कंज्यूमर डिमांड कमजोर होगी।

कुल मिलाकर, 2026 के अंत तक पीसी और लैपटॉप की शिपमेंट्स घट सकती हैं, क्योंकि बढ़ती लागत का पूरा असर बाजार पर दिखाई देगा।

शेनॉय ने कहा, "हमारे शुरुआती अनुमान के अनुसार, कंज्यूमर और कमर्शियल दोनों PC सेगमेंट में सालाना आधार पर लगभग 7-8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जाएगी।"

एनालिस्ट का कहना है कि कीमतों का दबाव ग्लोबल लेवल पर महसूस किया जा रहा है।

काउंटरपॉइंट रिसर्च की सीनियर एनालिस्ट अंशिका जैन ने Moneycontrol को बताया कि मेमोरी की कीमतें वर्तमान में पीसी इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़े अल्पकालिक लागत जोखिमों में से एक हैं।

जैन ने कहा, “DRAM और NAND की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी मुख्य रूप से AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के कारण हो रही है, जो सप्लाई को हाई-मार्जिन सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी सेगमेंट की ओर खिंच रही है। इससे दुनिया भर में डिवाइस निर्माताओं की लागत बढ़ रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि एंट्री-लेवल के खरीदार खरीदारी में देरी कर सकते हैं या कम स्पेसिफिकेशन वाले मॉडल चुन सकते हैं, जबकि गेमिंग, क्रिएटर्स और एंटरप्राइज यूजर्स जैसे प्रीमियम और प्रोफेशनल सेगमेंट कीमत को लेकर कम संवेदनशील हैं और मांग को बढ़ाते रहेंगे।

बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए, ब्रांड डिवाइसों को सुलभ बनाए रखने के तरीके भी तलाश रहे हैं। एनालिस्ट्स ने कहा कि कंपनियां प्रोडक्ट कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रही हैं, प्रमोशनल कैंपेन चला रही हैं और मांग को पूरा करने के लिए फाइनेंसिंग स्कीम पेश कर रही हैं।

शेनॉय ने कहा कि विंडोज रिफ्रेश साइकिल के कारण बड़ी कंपनियों ने पिछले साल ही कई अपग्रेड पूरे कर लिए थे, जबकि SMB और मिड-मार्केट कंपनियां पहले ‘वेट एंड वॉच’ का तरीका अपना रही थीं।

हालांकि, हाल ही में कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने कई खरीदारों को योजना से पहले ही खरीदारी करने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे बाजार फिलहाल स्थिर बना हुआ है।

ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के फाउंडर-चेयरमैन कैलाश लखियानी ने कहा कि लैपटॉप की कीमतें - स्मार्टफोन की तरह ही - नवंबर से हर महीने बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड और बढ़ेगा, क्योंकि मेमोरी की कीमतें बढ़ रही हैं, डॉलर की अस्थिरता है, महंगाई है और पश्चिम एशिया संघर्ष का असर भी है।

उन्होंने कहा कि मेमोरी की अधिक कीमतें और कालाबाजारी के कारण असेंबल्ड कंप्यूटर की कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कहा, "सरकार और ब्रांडों को उन ग्रे और ब्लैक मार्केट खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो इन कमियों का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूल रहे हैं।" उन्होंने कहा कि आगे और बढ़ोतरी से पहले इन डिवाइसों को खरीदने का यह सबसे अच्छा समय है।

यह भी पढ़ें: PS5 Pro India Launch: Sony PS5 Pro भारत में लॉन्च होने को तैयार, जानें अनुमानित कीमत और लॉन्च डिटेल्स

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।