Online Gaming Bill 2025: भारत में इंटरनेट और स्मार्टफोन की किफायती उपलब्धता ने जहां देश को "डिजिटल इंडिया" की राह पर आगे बढ़ाया, वहीं इसी के साथ एक और इंडस्ट्री ने चुपचाप अपनी जड़ें मजबूत कर लीं और वो है ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग। हालांकि, खेलों में पैसा लगाने की परंपरा भारत में नई नहीं है। सदियों से लोग जुए और सट्टेबाजी में शामिल रहे हैं, इसी वजह से इसे कानून के दायरे में रखा गया। लेकिन डिजिटल युग ने जुए और सट्टेबाजी को रियल मनी गेमिंग जैसा नया नाम और नया रूप दे दिया है।
साल 2006 से 2010 के बीच Ace2Three और RummyCircle जैसे शुरुआती प्लेटफॉर्म्स ने ऑनलाइन Rummy को लोकप्रिय बनाना शुरू किया। फिर 2008 में Dream11 आया और 2012 से फैंटेसी क्रिकेट को रियल मनी के साथ लॉन्च किया। क्रिकेट प्रेमियों के बीच इसकी ऐसी लोकप्रियता हुई कि आज हर तीसरे क्रिकेट फैन के मोबाइल में फैंटेसी गेमिंग ऐप मौजूद है। कोर्ट ने इसे "गेम ऑफ स्किल" करार दिया और इंडस्ट्री को एक कानूनी सहारा मिल गया।
UPI और लॉकडाउन ने बदली गेमिंग की किस्मत
2016 में जब टेलीकॉम कंपनियों ने इंटरनेट को सस्ता और आसान बनाया, तो रियल मनी गेमिंग की पहुंच छोटे कस्बों और गांवों तक हो गई। उसी दौरान UPI ने डिजिटल पेमेंट्स को आसान कर दिया और करोड़ों लोग गेमिंग ऐप्स में न केवल पैसा लगाने लगे, बल्कि जीत की रकम तुरंत निकालने भी लगे। कोविड-19 लॉकडाउन ने इस लहर को और तेज कर दिया, जब लाखों लोग मनोरंजन के लिए इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़ गए।
2018 से 2021 के बीच इस सेक्टर ने 700 मिलियन डॉलर से ज्यादा विदेशी निवेश खींचा और Dream11, MPL, Games24x7 जैसे स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न बन गए। 2023 तक भारत का ऑनलाइन गेमिंग मार्केट 3.7 अरब डॉलर का हो चुका था और अनुमान था कि 2029 तक यह 9.1 अरब डॉलर तक पहुंचेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस इंडस्ट्री की कमाई का 86% हिस्सा रियल मनी फॉर्मेट से आता है।
Online Gaming Bill 2025 नया कानून
लेकिन अब कहानी बदलने वाली है। सरकार ने हाल ही में संसद में Promotion & Regulation of Online Gaming Bill, 2025 पेश किया है, जो दोनों सदनों से पास भी हो चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा।
इस बिल के बाद ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह बैन लग जाएगा। चाहे वह "गेम ऑफ स्किल" हो या "गेम ऑफ चांस"। यानी अब न ऐसे गेम खेले जा सकेंगे, न इनसे जुड़े लेन-देन होंगे और न ही इनके विज्ञापन दिखाई देंगे। हालांकि, फ्री-टू-प्ले और सब्सक्रिप्शन आधारित गेम्स को छूट मिलेगी। वहीं, इस कानून को तोड़ने वालों को भारी जुर्माना और तीन साल तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।