कच्छ के रण उत्सव घूमने का बना रहे हैं प्लान, इन जगहों को भी एक बार जरूर करें एक्सप्लोर

कच्छ का रण अपनी सफेद रेत, चांदनी रातों और रण उत्सव की रंगीनियों के कारण दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। दिन और रात में इसका नजारा अलग-अलग रंगों में बदलता है। उत्सव के दौरान यहां रौनक रहती है। आइए जानते हैं कच्छ घूमने का सही समय कौन सा होता है

अपडेटेड Jan 19, 2026 पर 7:55 PM
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कच्छ के रण घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे बेहतर माना जाता है (Photo: Canva)

रण उत्सव की चमक-दमक, सफेद रेगिस्तान और चांदनी रातों की खूबसूरती कच्छ को दुनिया भर के टूरिस्टों के लिए खास बना देती है। दूर-दूर तक फैला कच्छ का रण दिन में बेहद सुंदर दिखता है और रात में जब चांदनी फैलती है, तो ये नजारा किसी जादू से कम नहीं लगता। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नमक का रेगिस्तान हल्के गुलाबी से लेकर चांदी जैसे रंगों में बदल जाता है। कच्छ का ये इलाका इतिहास, संस्कृति, वन्यजीव और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर होता है।

रण उत्सव के दौरान ये इलाका सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ऊंटों और पारंपरिक खाने से गुलजार रहता है। लेकिन जब भीड़ नहीं होती तब यहां की शांति अपने आप में एक अलग ही सुकून देती है। आइए जानते हैं कच्छ घूमने का सही समय कौन सा होता है और कच्छ जा रहे हैं तो कौन सी जगहों पर घूमना चाहिए।

कब जाएं कच्छ के रण घूमने


कच्छ के रण घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान मौसम अच्छा रहता है और नमक के रेगिस्तान तक पहुंचना भी आसान होता है। नवंबर से फरवरी के बीच रण उत्सव होता है, इसलिए यही समय सबसे ज्यादा भीड़ वाला होता है। गर्मियों में यहां बहुत तेज गर्मी पड़ती है, जबकि मानसून में रण के कुछ हिस्से पानी से भर जाते हैं।

सफेद रेगिस्तान

सफेद रेगिस्तान कच्छ के रण का सबसे मशहूर और आसानी से पहुंचने वाला हिस्सा है। ये जगह फोटो खींचने के लिए सबसे पसंदीदा मानी जाती है। पूर्णिमा की रात में नमक की जमीन चांदनी में चमक उठती है और नजारा बेहद खास लगता है। अगर रात में घूमने का प्लान हो, तो पहले से परमिट लेकर सही तैयारी करना जरूरी है।

भुज

भुज को कच्छ का सांस्कृतिक दिल माना जाता है। यहां म्यूजियम, मंदिर और रंग-बिरंगे बाजार देखने को मिलते हैं, जो पूरे इलाके की झलक दिखाते हैं। आइना महल और प्राग महल जरूर देखें, जो कच्छ के शाही इतिहास और अनोखी वास्तुकला को दर्शाते हैं।

काला डूंगर

काला डूंगर कच्छ की सबसे ऊंची जगह है, जहां से पूरे ग्रेट रण का शानदार दृश्य दिखाई देता है। साफ मौसम में सफेद नमक की जमीन दूर तक फैली नजर आती है, जो आसपास की पहाड़ियों के साथ खूबसूरत कंट्रास्ट बनाती है। यहां स्थित दत्तात्रेय मंदिर और रोज होने वाली परंपराएं भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

मांडवी बीच

कच्छ का समुद्री किनारा कई लोगों को चौंका देता है। मांडवी बीच पर साफ रेत, शांत पानी और दूसरी मशहूर जगहों के मुकाबले कम भीड़ देखने को मिलती है। पास ही स्थित विजय विलास पैलेस घूमने में शाही अनुभव देता है और सूर्यास्त के समय यह जगह और भी खूबसूरत लगती है।

धोलावीरा

कच्छ में स्थित धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां की उन्नत नगर योजना, जल संरक्षण प्रणाली और बड़े पत्थर के निर्माण आज भी हैरान कर देते हैं। यहां घूमते हुए ऐसा महसूस होता है जैसे आप एक बेहद समझदार और दूरदर्शी सभ्यता के समय में पहुंच गए हों।

 

होडका गांव

होडका गांव कच्छ की असली पहचान से रूबरू कराता है। यहां की लोक कला, कढ़ाई, मिट्टी के घर और ग्रामीण जीवन का अनुभव बेहद खास होता है। यह जगह शहर की भागदौड़ से दूर, सादगी और संस्कृति को करीब से महसूस करने का मौका देती है।

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