Domestic Air Travel Gets Costlier: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय यात्रियों की जेब पर पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से विमान ईंधन (ATF) महंगा हो गया है, जिसके कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई किरायों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स और इंडस्ट्री विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर फ्यूल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में टिकट दरें और भी बढ़ सकती हैं।
ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म 'EaseMyTrip' के अनुसार, हवाई किरायों में पहले ही बड़ा अंतर देखा जा रहा है:
घरेलू रूट: एक तरफ के किराए में औसतन ₹1,500 की बढ़ोतरी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय रूट: विदेशी यात्राओं के लिए औसत किराया ₹15,000 तक बढ़ गया है।
ऑपरेशनल कॉस्ट: विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस की ईंधन लागत में 8-9% का इजाफा हुआ है, जिसका उनके कुल संचालन पर 20-25% तक असर पड़ा है।
हवाई किरायों में यह बढ़ोतरी सभी रूटों पर एक समान नहीं हुई है। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु जैसे व्यस्त रूटों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है। वहीं गोवा जैसे टूरिस्ट हब के लिए मांग अधिक होने के कारण वहां के टिकट पहले ही महंगे हो चुके है।
आगामी महीनों में और बढ़ेंगे दाम?
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि किराए में अभी और बढ़ोतरी होनी बाकी है। एयरलाइंस ने पहले ही ₹200 से ₹950 तक का फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है। अनुमान है कि अगले 2-3 महीनों में घरेलू हवाई किरायों में 10% से 20% तक की कुल बढ़ोतरी देखी जा सकती है। TravClan के अनुसार, एयरलाइंस धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का बोझ यात्रियों पर डालती हैं, जिसका असर अगले 6-8 हफ्तों में साफ दिखेगा।
बदल रहा है यात्रियों का व्यवहार
महंगे होते टिकटों के बावजूद यात्रा की मांग में कमी नहीं आई है, लेकिन लोग अब अपनी प्लानिंग में बदलाव कर रहे हैं। बढ़ते दामों से बचने के लिए यात्री अब आखिरी समय के बजाय काफी पहले टिकट बुक कर रहे हैं। छोटी दूरी के लिए लोग हवाई जहाज की जगह ट्रेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा टियर-2 शहरों की यात्रा में भी तेजी देखी जा रही है।
वहीं इंटरनेशनल ट्रैवल के लोग लंबी दूरी के बजाय थाईलैंड, वियतनाम, बाली और श्रीलंका जैसे पास के गंतव्यों को चुन रहे हैं, जहां सर्च और बुकिंग में 15-25% की बढ़ोत्तरी हुई है।
क्या गर्मियों की छुट्टियों पर पड़ेगा असर?
पीक समर सीजन के दौरान डिमांड 15-20% बढ़ने की उम्मीद है। गोवा, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे घरेलू डेस्टिनेशन अभी भी टॉप लिस्ट में बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ट्रैवल मार्केट काफी लचीला है और पिछले संकटों की तरह इस बार भी मांग बनी रहेगी, हालांकि यात्रियों के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।