जहां पग-पग पर गूंजती है 'हरे कृष्णा' की धुन, जन्माष्टमी पर जरूर करें इन मंदिरों के दर्शन!

जन्माष्टमी को उन जगहों पर मनाना और भी खास हो जाता है, जहां भगवान कृष्ण से जुड़ी कहानियां और परंपराएं आज भी जीवित हैं। इस मौके शहरों के कृष्ण मंदिरों में आधी रात को भजन, मंत्र, फूलों की सजावट, अभिषेक और झांकियों के साथ भव्य उत्सव मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी और आधी रात का जश्न 5 सितंबर की सुबह तक चलेगा। यदि आप जन्माष्टमी पर घूमने के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी लेना चाहते हैं, तो इन प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों की यात्रा आपके लिए यादगार हो सकती है।

अपडेटेड Aug 31, 2026 पर 3:45 PM
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जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की जन्मभूमि और उनसे जुड़ी पवित्र जगहों पर इस त्यौहार को मनाने का अलग ही अनुभव होता है। जब आधी रात को कृष्ण जन्म का समय करीब आता है, तो मंदिरों में घंटियों की आवाज, भजन, मंत्र और जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और भगवान कृष्ण की झांकियां भी निकाली जाती हैं।

भगवान कृष्ण से जुड़ी कई ऐसी पवित्र जगहें हैं, जहां जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास तरीके से मनाया जाता है। मंदिरों में देशभर से भक्त दर्शन और कृष्ण जन्म का उत्सव देखने पहुंचते हैं। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी और आधी रात को विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।

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1. द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका

गुजरात की द्वारका भगवान कृष्ण के जीवन के उस दौर से जुड़ी मानी जाती है, जब उन्होंने यहां अपना राज्य बसाया था। यह जगह चार धाम तीर्थ स्थलों में भी शामिल है। जन्माष्टमी के दौरान द्वारकाधीश मंदिर को खूबसूरती से सजाया जाता है और यहां विशेष पूजा, भजन और आधी रात को कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरा द्वारका शहर त्योहार के रंग में नजर आता है। अगर आप धार्मिक यात्रा के साथ समुद्र किनारे घूमने का मजा भी लेना चाहते हैं, तो जन्माष्टमी पर द्वारका जाना अच्छा अनुभव हो सकता है।

2. श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

राजस्थान के नाथद्वारा में भगवान कृष्ण की पूजा श्रीनाथजी के बाल रूप में की जाती है। यही वजह है कि इस मंदिर का कृष्ण के बचपन से खास संबंध माना जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में विशेष सजावट और पूजा होती है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। श्रीनाथजी मंदिर अपनी खूबसूरत पिछवाई कला के लिए भी प्रसिद्ध है। इन चित्रों में कृष्ण, गायों, कमल के फूलों और उनके जीवन से जुड़े कई दृश्य देखने को मिलते हैं। अगर आप कृष्ण भक्ति के साथ राजस्थान की कला और संस्कृति को भी करीब से देखना चाहते हैं, तो नाथद्वारा एक शानदार जगह हो सकती है।

3. गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर, केरल

केरल का गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर भी भगवान कृष्ण के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यहां कृष्ण की पूजा और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का काफी पुराना इतिहास है। जन्माष्टमी और कृष्ण से जुड़े त्योहारों के दौरान भक्त बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं और विशेष पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। मंदिर की पूजा-पद्धति, वातावरण और वास्तुकला उत्तर भारत के कृष्ण मंदिरों से काफी अलग महसूस होती है। अगर आप जन्माष्टमी के दौरान कृष्ण भक्ति का दक्षिण भारतीय रूप देखना चाहते हैं, तो गुरुवायुर आपके लिए एक अलग और यादगार धार्मिक अनुभव हो सकता है।

4. श्री कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा

मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी मनाने के लिए इससे खास जगह शायद ही कोई हो। जन्माष्टमी के दिन यहां देशभर से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर में आधी रात को कृष्ण जन्मोत्सव की खास पूजा और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। मंदिर और आसपास के इलाकों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। जगह-जगह कृष्ण की झांकियां, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलते हैं। जिस जगह को भगवान कृष्ण के जन्म से जोड़ा जाता है, वहां आधी रात को जन्मोत्सव में शामिल होना भक्तों के लिए बेहद खास अनुभव हो सकता है।

5. इस्कॉन कृष्ण बलराम मंदिर, वृंदावन

अगर आपको भजन, कीर्तन और भक्ति संगीत पसंद है, तो इस्कॉन कृष्ण बलराम मंदिर जन्माष्टमी के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां जन्माष्टमी के दौरान दिनभर धार्मिक कार्यक्रम, कीर्तन, अभिषेक और विशेष पूजा होती है। भक्त कृष्ण नाम का जाप करते हुए भक्ति गीतों में शामिल होते हैं और आधी रात को कृष्ण जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस्कॉन दिल्ली के आधिकारिक 2026 कैलेंडर के अनुसार, 4 सितंबर को जन्माष्टमी और 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। इसलिए इस दौरान वृंदावन में कुछ समय बिताकर दोनों दिनों के उत्सव का आनंद लिया जा सकता है।

6. श्री कृष्ण मठ, उडुपी

दक्षिण भारत में जन्माष्टमी का अलग रंग देखने के लिए उडुपी का श्री कृष्ण मठ खास जगह है। यह मंदिर मध्वाचार्य और द्वैत परंपरा से जुड़ा हुआ है और यहां भगवान कृष्ण की पूजा की अपनी अलग परंपराएं हैं। जन्माष्टमी पर मंदिर में खास पूजा और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। यहां त्योहार से जुड़ी ‘विटला पिंड’ जैसी पारंपरिक गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं। इसमें भक्त कृष्ण के बचपन की शरारतों को याद करते हुए जुलूस निकालते हैं और दही, मक्खन जैसी चीजों से भरे मटके फोड़ते हैं। इस वजह से उडुपी में जन्माष्टमी का माहौल उत्तर भारत के उत्सव से काफी अलग और खास नजर आता है।

7. बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन

मथुरा के बाद आप वृंदावन का रुख कर सकते हैं, जो भगवान कृष्ण के बचपन और राधा व गोपियों से जुड़ी कहानियों के लिए जाना जाता है। बांके बिहारी मंदिर वृंदावन के सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में से एक है। जन्माष्टमी के मौके पर यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और उत्सव में शामिल होने पहुंचते हैं। मंदिर के आसपास भजन और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो जाता है। अगर मथुरा आपको कृष्ण के जन्म से जोड़ता है, तो वृंदावन की यात्रा आपको उनके बचपन और उनसे जुड़ी पुरानी कहानियों के करीब ले जाती है।

जन्माष्टमी पर इन सभी मंदिरों की यात्रा और दर्शन करके परंपराओं और भक्ति को करीब से देखने का मौका मिलता है। मथुरा में आधी रात का जन्मोत्सव, वृंदावन में भजन-कीर्तन, द्वारका का भव्य जश्न और उडुपी व नाथद्वारा की अलग परंपराएं इस त्योहार को और खास बनाती हैं। आप इस जन्माष्टमी को यादगार बनाना चाहते हैं, तो किसी एक मंदिर की यात्रा चुनकर भक्ति, संस्कृति और त्योहार के रंगों को करीब से महसूस कर सकते हैं।

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