उत्तराखंड के फेमस फूलों की घाटी को टूरिस्ट के लिए खोल दिया गया है। (Photo Credit: Canva)
उत्तराखंड की सुंदर फूलों की घाटी हर साल जून से सितंबर तक ही खुली रहती है, क्योंकि इसके बाद ठंड और बर्फबारी की वजह से रास्ते खतरनाक हो जाते हैं। अक्टूबर में इसे बंद कर दिया जाता है। (Photo Credit: Canva)
यह घाटी अपनी रंग-बिरंगी फूलों और नेचुरल ब्यूटी के लिए काफी फेमस है। जुलाई और अगस्त के महीने में यहां करीब 350 से ज्यादा किस्म के फूल देखे जा सकते हैं।(Photo Credit: Canva)
फूलों की घाटी के खूबसूरत नजारे को देखने के लिए हर साल देश और विदेश से सैकड़ों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पूरे सीजन में यहां 500 से भी ज्यादा फूलों की प्रजातियां खिलती हैं, जो इसे और भी खास बना देती हैं। (Photo Credit: Canva)
फूलों की घाटी में आपको कई रंग-बिरंगे और सुंदर फूलों की झलक देखने को मिलती है, जैसे ऑर्किड, खसखस, प्रिमुला, गेंदा, डेजी और एनीमोन। यहां औषधीय गुणों वाले पौधे और कई प्रकार की जड़ी-बूटियाँ भी पाई जाती हैं। (Photo Credit: Canva)
यहां पर आपको फूलों के अलावा पहाड़ों की तलहटी, ऊंचे बुग्याल, झरने, नदियां और घने जंगल भी देखने को मिलते हैं, जो इसे और अधिक खास बना देते है। धार्मिक महत्व वाला ब्रह्मकमल भी यहीं खिलता है, जिसे नंदा देवी को चढ़ाया जाता है। (Photo Credit: Canva)
फूलों की घाटी उत्तराखंड के नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है और यह करीब 87 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। यह खूबसूरत घाटी नंदा देवी पर्वत के नजदीक स्थित है, जो देश का दूसरा ऊंचा पहाड़ है। (Photo Credit: Canva)
नंदा देवी न सिर्फ एक पर्वत है, बल्कि धार्मिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के लोग नंदा देवी को अपनी रक्षक देवी के रूप में पूजते हैं। (Photo Credit: Canva)
फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जबकि सबसे पास का रेलवे स्टेशन ऋषिकेश में है। इन जगहों से आप सड़क मार्ग के जरिए गोविंदघाट पहुंच सकते हैं, जो आखिरी मोटरेबल पॉइंट है। वहां से आपको करीब 16 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है ताकि आप घाटी तक पहुंच सकें। (Photo Credit: Canva)