शहर की नौकरी रास नहीं आई तो पहाड़ों का रुख किया, अब ₹70-80 हजार महीना कमाता है युवक

23 साल के जतिन वाधनानी ने नौकरी और शहर की जिंदगी छोड़कर हिमाचल के पहाड़ों को अपना नया ठिकाना बनाया। आज वह कंटेंट क्रिएशन, फ्रीलांस काम और अपने स्टार्टअप से ₹70,000-₹80,000 महीना कमाते हैं। खास बात यह है कि उनका निजी मासिक खर्च करीब ₹12,000 है, जिससे वह बचत और निवेश भी कर पा रहे हैं

अपडेटेड Sep 17, 2026 पर 12:25 PM
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जतिन के लिए यह बदलाव सिर्फ कम खर्च में रहने या ज्यादा पैसे बचाने की कहानी नहीं है।

23 साल के जतिन वाधनानी ने पिछले साल एक ऐसा फैसला लिया, जिसे सुनकर कई लोगों को जोखिम भरा लग सकता है। उन्होंने राजस्थान के एक शहर में अपना घर और नौकरी छोड़ दी और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में जाकर रहने लगे। आज वह न सिर्फ अपनी पसंद की जिंदगी जी रहे हैं, बल्कि कंटेंट क्रिएशन और अपने स्टार्टअप के जरिए हर महीने करीब ₹70,000 से ₹80,000 तक कमा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पहाड़ों में उनकी जिंदगी का निजी खर्च करीब ₹12,000 महीना है। कम खर्च और कई आय स्रोतों की वजह से वह बचत और निवेश भी कर पा रहे हैं।

सुबह काम, शाम पहाड़ों के नाम


नागर के पास रहने वाले जतिन के लिए पहाड़ सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि उनकी पसंद की जीवनशैली का हिस्सा हैं। जब वह काम में व्यस्त नहीं होते, तो बाइक लेकर पहाड़ी रास्तों पर निकल जाते हैं। कभी ट्रेकिंग, कभी झरने तक की सैर और कभी पहाड़ी ट्रेल्स पर बाइक राइड—उनका खाली समय अक्सर घर के बाहर ही गुजरता है। जतिन कहते हैं कि उन्हें हमेशा से एडवेंचर पसंद रहा है और बाहर रहना उन्हें शहर की रोजमर्रा की जिंदगी से ज्यादा पसंद है।

ट्रैवल कंसल्टेंट की नौकरी से स्टार्टअप तक

दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज से टूरिज्म मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले जतिन ने कॉलेज के अंतिम वर्ष में ही अपना बिजनेस शुरू करने का विचार किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब एक साल ट्रैवल कंसल्टेंट के तौर पर काम किया। लेकिन नौकरी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वह ऐसी जिंदगी चाहते हैं, जिसमें काम करने की जगह तय न हो। इसी सोच ने उन्हें नौकरी छोड़कर अपने दम पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने Workavay शुरू किया, जो रिमोट वर्क करने वाले लोगों के लिए workation का अनुभव उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

Workation को कम्युनिटी बनाने की कोशिश

Workavay के जरिए जतिन छोटे समूहों में रिमोट वर्कर्स के लिए छह दिन और पांच रातों के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। नागर, मनाली के आसपास और उदयपुर जैसे स्थानों पर होने वाले इन कार्यक्रमों में रहने की जगह, खाना और योग, ट्रेकिंग और माउंटेन रन जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं।

जतिन के मुताबिक, उनका मकसद केवल लोगों को रहने की जगह देना नहीं, बल्कि रिमोट वर्कर्स की एक कम्युनिटी बनाना है, जहां काम के साथ घूमने और नए लोगों से मिलने का मौका भी मिले।

कमाई के कई रास्ते

जतिन की आय सिर्फ Workavay से नहीं आती। वह फ्रीलांस वीडियो एडिटिंग करते हैं, क्लाइंट्स के सोशल मीडिया अकाउंट संभालते हैं और अपना स्टार्टअप भी चलाते हैं। इन सभी स्रोतों से उनकी मासिक कमाई करीब ₹70,000 से ₹80,000 के बीच रहती है। वह हर महीने लगभग ₹10,000 निवेश और SIP में लगाते हैं। कमाई का एक हिस्सा स्टार्टअप को आगे बढ़ाने और नए workation destinations तलाशने में भी खर्च होता है।

आखिर क्यों चुनी पहाड़ों वाली जिंदगी?

जतिन के लिए यह बदलाव सिर्फ कम खर्च में रहने या ज्यादा पैसे बचाने की कहानी नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने यह जीवन इसलिए चुना क्योंकि वह अपने काम के साथ अपनी पसंद की जिंदगी भी जीना चाहते थे। आज उनकी दिनचर्या में सुबह क्लाइंट्स का काम और कॉल्स होते हैं, दोपहर में Workavay की जिम्मेदारियां और शाम को पहाड़ों की सैर। उनके लिए सफलता का मतलब सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि ऐसा जीवन बनाना है जिसमें काम और एडवेंचर दोनों साथ चल सकें।

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