महंगे गैजेट और जूते खरीदने के बावजूद बचाए ₹40 लाख, युवक ने बताया पैसा संभालने का अपना तरीका
बेंगलुरु में 26 साल के एक युवक की पड़ोसी से जुड़ी छोटी-सी घटना ने उसे पैसों को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया। दोनों करीब ₹18 हजार किराया देते हैं, लेकिन एक दिन पड़ोसी ने दोस्तों से ₹5 हजार उधार मांगे। वजह थी किराए और EMI के बाद पैसों की कमी। मामला अब चर्चा में है।
युवक ने यह भी बताया कि वह कोई ऐसा इंसान नहीं है जो हर पैसे को बचाकर रखता हो।
बेंगलुरु में रहने वाले 26 साल के एक युवक ने पड़ोस में हुई एक छोटी-सी घटना शेयर की, जिसने उसे पैसों को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया। उसकी पड़ोसी भी करीब ₹18 हजार किराया देती है और बाहर से उसकी जिंदगी काफी सामान्य दिखती थी। लेकिन एक दिन उसने दोस्तों से ₹5 हजार उधार मांगे। वजह थी किराया और EMI कटने के बाद अचानक पैसों की कमी। युवक के लिए यह बात इसलिए चौंकाने वाली थी, क्योंकि उसे लगता था कि समान किराए और लाइफस्टाइल का मतलब लगभग समान आर्थिक स्थिति भी होगी।
इस घटना के बाद उसने अपनी बचत और खर्च की आदतों पर गौर किया। मामला Reddit पर पहुंचा तो लोगों ने भी खुलकर चर्चा शुरू कर दी। किसी ने इसे Gen Z की बढ़ती खर्चीली आदतों से जोड़ा, तो किसी ने कहा कि किसी की जिंदगी देखकर उसकी जेब का अंदाजा लगाना सही नहीं।
EMI कटी और फिर पड़ गई रुपये 5 हजार की जरूरत
युवक ने Reddit पर बताया कि महीने की करीब 7 तारीख को उसने पड़ोसी को कुछ दोस्तों से 5 हजार रुपये मांगते सुना। PG के कमरे ज्यादा साउंडप्रूफ नहीं होने के कारण बातचीत सुनाई दे गई। महिला ने बताया कि उसने अभी किराया दिया है और उसके खाते से EMI भी ऑटो-डेबिट हो गई, इसलिए उसे पैसों की जरूरत पड़ गई। यह सुनकर युवक को काफी हैरानी हुई। उसे लगा कि एक जैसी उम्र और लगभग समान किराए के कारण दोनों की आर्थिक स्थिति भी मिलती-जुलती होगी।
तभी युवक ने देखा अपना 40 लाख रुपये का पोर्टफोलियो
उसी दौरान वह अपने स्टॉक पोर्टफोलियो को देख रहा था, जिसमें उसके मुताबिक करीब 40 लाख रुपये थे। यहीं से उसने दोनों की आर्थिक स्थिति की तुलना करनी शुरू कर दी। उसका कहना था कि अक्सर हम अपने आसपास रहने वाले लोगों को अपने जैसा ही समझ लेते हैं, जबकि उनकी कमाई, सेविंग, EMI और जिम्मेदारियां बिल्कुल अलग हो सकती हैं।
महंगे सामान हैं, फिर भी हर खर्च पर नजर
युवक ने यह भी बताया कि वह कोई ऐसा इंसान नहीं है जो हर पैसे को बचाकर रखता हो। उसके पास Mac, गेमिंग PC, iPad, महंगा स्मार्टफोन और करीब ₹16 हजार के जूते भी हैं।उसके मुताबिक, फर्क यह है कि वह हर हफ्ते कपड़े खरीदने या छोटी-छोटी चीजों पर लगातार पैसे खर्च करने से बचता है। यानी कभी-कभार महंगी चीज खरीदने और हर महीने ढेर सारे छोटे खर्च करने में बड़ा अंतर है।
40 लाख रुपये में आधा हिस्सा सैलरी का, बाकी अनुशासन का
युवक ने अपनी आर्थिक स्थिति का श्रेय सिर्फ अच्छी सैलरी को नहीं दिया। उसका कहना है कि करीब 40 लाख रुपये के पोर्टफोलियो में लगभग 20 लाख रुपये उसकी बेहतर सैलरी की वजह से आए, लेकिन बाकी रकम बनाने में पैसों को लेकर अनुशासन का भी बड़ा योगदान रहा।
वह छुट्टियों और दोस्तों के साथ घूमने पर भी खर्च करता है। कॉलेज रीयूनियन के लिए उसने करीब 20-30 रुपये हजार खर्च किए थे। लेकिन उसका कहना है कि अगर ऐसी लाइफस्टाइल हर हफ्ते हो, तो इतनी बचत करना मुश्किल हो जाता।
Ankur Warikoo के वीडियो ने भी सोच बदलने में मदद की
युवक ने अपनी बात को फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू के एक YouTube वीडियो से भी जोड़ा। वीडियो में लोगों को पिछले 30 दिनों के खर्च देखने और यह सोचने की सलाह दी गई थी कि पैसा आखिर कहां जा रहा है। इसके बाद युवक ने कपड़ों, रेस्टोरेंट, छुट्टियों और फोन की EMI जैसे खर्चों पर गौर किया। उसके मुताबिक, सिर्फ खर्च लिखना ही जरूरी नहीं है, बल्कि हर खरीदारी से पहले यह सवाल पूछना ज्यादा जरूरी है, “क्या मुझे सच में इसकी जरूरत है?”
Gen Z पैसे बचा रही है या सिर्फ खर्च कर रही है?
Reddit पर इस घटना के बाद चर्चा Gen Z की वित्तीय आदतों तक पहुंच गई। कुछ लोगों ने कहा कि युवा आजकल लेटेस्ट गैजेट, पार्टी, ट्रैवल और दूसरी चीजों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं और कई लोग महीने-दर-महीने की सैलरी पर निर्भर हो गए हैं। कुछ यूजर्स ने EMI और क्रेडिट पर जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने को भी चिंता की वजह बताया। उनका मानना था कि छोटी-छोटी EMI मिलकर भविष्य में बड़ा आर्थिक बोझ बन सकती हैं।
लेकिन हर बात का दोष Gen Z को देना सही नहीं
कई लोगों ने इस सोच से असहमति भी जताई। उनका कहना था कि पैसों की खराब आदतों को सिर्फ Gen Z से जोड़ना सही नहीं है। आर्थिक अनुशासन और सेविंग की समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति के साथ हो सकती है। इसके अलावा, सिर्फ ₹5 हजार उधार मांगने से यह तय नहीं किया जा सकता कि बेंगलुरु वाली महिला आर्थिक रूप से कमजोर है। उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां, कर्ज या दूसरे खर्च हो सकते हैं, जिनके बारे में युवक को जानकारी नहीं है।
एक जैसी लाइफस्टाइल का मतलब एक जैसी आर्थिक स्थिति नहीं
इस पूरी कहानी से सबसे बड़ी बात यही निकलकर सामने आती है कि साथ रहने या एक जैसा दिखने से किसी की आर्थिक स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।