'पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती'... इस महिला ने ऐसे किया साबित, वीडियो हुआ वायरल

Viral Video: कहते हैं सपनों की कोई उम्र नहीं होती, और इन दिनों वायरल हो रहा एक वीडियो इसी बात को साबित कर रहा है। एक महिला की अनोखी यात्रा ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। उनका हौसला और जुनून देखकर लोग न सिर्फ हैरान हैं, बल्कि उनकी जमकर सराहना भी कर रहे हैं

अपडेटेड Jun 20, 2026 पर 10:31 AM
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वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स ने महिला के जज्बे को सलाम करना शुरू कर दिया।

कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, लेकिन बहुत कम लोग इस बात को अपने जीवन में सच साबित कर पाते हैं। समय के साथ जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, सपने पीछे छूट जाते हैं और कई बार अधूरी पढ़ाई सिर्फ एक याद बनकर रह जाती है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं को चुनौती देकर अपने अधूरे सपनों को फिर से जीने का साहस जुटाते हैं। यही वजह है कि जब कोई लंबे अंतराल के बाद शिक्षा की राह पर लौटता है, तो उसकी कहानी सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह जाती, बल्कि हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन जाती है।

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है, जिसने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है और सपनों को पूरा करने की कोशिश कभी बेकार नहीं जाती।

कॉलेज गेट पर लौटी अधूरी पढ़ाई की कहानी


इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में महिला आत्मविश्वास के साथ अपने कॉलेज पहुंचती नजर आती हैं। उनके चेहरे पर किसी तरह की झिझक नहीं, बल्कि अपने सपने को पूरा करने का उत्साह साफ दिखाई देता है। वीडियो साझा करने वाली मंजू नारंग ने अपने प्रोफाइल में खुद को "50 की उम्र में कॉलेज शुरू करने वाली छात्रा, योगा स्टूडेंट और गृहिणी" बताया है।

'पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती' को किया सच साबित

वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, "पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती"। वहीं स्क्रीन पर दिख रहे टेक्स्ट ने लोगों का ध्यान और भी ज्यादा खींचा, जिसमें लिखा था, "35 साल बाद भी अपने बैक पेपर क्लियर कर रही हूं।"

वीडियो में मंजू कहती हैं, "आज मेरा कॉलेज में एग्जाम है और मैं परीक्षा देने जा रही हूं।" इस दौरान उनके बेटे की आवाज सुनाई देती है, जो उन्हें "ऑल द बेस्ट" कहकर शुभकामनाएं देता है।

सोशल मीडिया पर मिली ढेरों शुभकामनाएं

वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स ने महिला के जज्बे को सलाम करना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा, "आप पर गर्व है आंटी, ऑल द बेस्ट।" दूसरे ने कहा, "कभी हार मत मानिए, आपकी कहानी प्रेरणा है।"

एक अन्य यूजर ने भावुक टिप्पणी करते हुए लिखा, "अगर मुझे मौका मिलता तो मैं खुद इनके बैक पेपर क्लियर करवाने में मदद करता। शिक्षा की दुनिया ऐसे ही लोगों की वजह से जीवित है, जो सीखने का जुनून कभी नहीं छोड़ते।"

दूसरे मौके की ताकत बनी यह कहानी

यह वीडियो केवल एक परीक्षा देने की कहानी नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए संदेश है जिन्होंने कभी उम्र, जिम्मेदारियों या परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ दिया। मंजू नारंग की यह यात्रा साबित करती है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई निर्धारित उम्र नहीं होती। अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो जिंदगी किसी भी मोड़ पर नई शुरुआत का मौका दे सकती है।

सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती

50 साल की उम्र में कॉलेज की परीक्षा देने पहुंची यह महिला आज सोशल मीडिया पर प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं। उनका जज्बा बता रहा है कि शिक्षा केवल डिग्री पाने का माध्यम नहीं, बल्कि खुद को फिर से खोजने और अपने अधूरे सपनों को पूरा करने का रास्ता भी है।

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