टॉपर को मिला ₹6 लाख का पैकेज और 6.8 CGPA वाले बैकबेंचर को Microsoft में मिली 32 लाख की नौकरी! नंबर Vs हुनर का गजब मामला

कॉलेज में 9 CGPA से ज्यादा हासिल करना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन क्या यही सफलता की गारंटी है? आदित्य जामवाल की कहानी इस सोच को नया नजरिया देती है। 6.8 CGPA के बावजूद वह आज Microsoft में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनकी सालाना सैलरी ₹32 लाख से ज्यादा बताई जा रही है

अपडेटेड Aug 20, 2026 पर 2:17 PM
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इस कहानी का मकसद अच्छे अंकों की अहमियत को खत्म करना नहीं है।

कॉलेज में अच्छे नंबर लाना हर छात्र का सपना होता है। लेकिन क्या सिर्फ अच्छी CGPA ही करियर की सफलता तय करती है? सोशल मीडिया पर सामने आई आदित्य जामवाल की कहानी इस सवाल को एक अलग नजरिए से देखने पर मजबूर करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 6.8 CGPA के साथ पढ़ाई पूरी करने वाले आदित्य आज Microsoft में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी सालाना सैलरी ₹32 लाख से ज्यादा बताई गई है।

9.2 CGPA वाले छात्र से हुई तुलना

X पर शेयर की गई पोस्ट में आदित्य की तुलना एक ऐसे छात्र से की गई, जिसने कथित तौर पर 9.2 CGPA हासिल की थी। पोस्ट के मुताबिक, वो छात्र फिलहाल एक स्टार्टअप में करीब 6 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर काम कर रहा है। अगर पोस्ट में दिए गए आंकड़े सही हैं, तो दोनों के बताए गए पैकेज में सालाना 26 लाख रुपये से ज्यादा का अंतर है।


आदित्य ने नंबरों के बजाय स्किल पर दिया जोर

पोस्ट के मुताबिक, कॉलेज के दौरान आदित्य ने सिर्फ अपनी पढ़ाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने तकनीकी कौशल मजबूत करने पर खास ध्यान दिया। उन्होंने करीब 50 डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम पैटर्न पर काम किया और ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे तकनीकी इंटरव्यू के दौरान विस्तार से समझाया जा सके।

इंटरव्यू की तैयारी में नहीं छोड़ी कोई कसर

आदित्य ने लो-लेवल सिस्टम डिजाइन के साथ-साथ ऑपरेटिंग सिस्टम, डेटाबेस और कंप्यूटर नेटवर्क जैसे विषयों की समझ भी मजबूत की। इसके अलावा, आज के तकनीकी इंटरव्यू को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जनरेटिव एआई की बुनियादी जानकारी भी हासिल की। यानी तैयारी सिर्फ किताबी ज्ञान तक नहीं थी, बल्कि सीखी हुई चीजों को व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल करने पर भी जोर था।

6.8 CGPA वाली कहानी का असली संदेश

इस कहानी का मकसद अच्छे अंकों की अहमियत को खत्म करना नहीं है। CGPA आज भी उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति और कई प्लेसमेंट अवसरों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन आदित्य की बताई गई यात्रा यह जरूर दिखाती है कि अच्छे नंबरों के साथ व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी कौशल भी करियर में बड़ा फर्क डाल सकते हैं।

‘मार्क्स के पीछे नहीं, नॉलेज के पीछे भागो’

पोस्ट के अंत में लिखा संदेश है, “Don't chase the marks. Chase the knowledge.” यानी केवल अंक बढ़ाने की दौड़ में रहने के बजाय छात्रों को अपनी समस्या सुलझाने की क्षमता, प्रोजेक्ट्स, तकनीकी ज्ञान और इंटरव्यू कौशल पर भी काम करना चाहिए। आखिरकार, CGPA रिज्यूमे पर एक आंकड़ा हो सकता है, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब सामने कोई समस्या, प्रोजेक्ट या इंटरव्यू का सवाल हो।

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