Video: 8 साल के बच्चे ने कर दिखाया कमाल! ₹760 के चिप से बना डाला बिना इंटरनेट चलने वाला AI स्टोरीटेलर
8 साल के लक्षवीर ने कम उम्र में ऐसा AI डिवाइस बनाकर सबको चौंका दिया है, जो बिना इंटरनेट के कहानियां तैयार कर सकता है और उन्हें आवाज में सुना भी सकता है। सस्ते हार्डवेयर और ओपन-सोर्स तकनीक की मदद से तैयार यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि बच्चों की रचनात्मक सोच नई तकनीकी संभावनाओं को जन्म दे सकती है
लक्षवीर अब तक करीब 200 टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट पूरे कर चुका है।
आज के दौर में जहां बच्चे ज्यादातर समय डिजिटल कंटेंट देखने में बिताते हैं, वहीं 8 साल के लक्षवीर ने अपनी रचनात्मक सोच और तकनीकी समझ से सबको हैरान कर दिया है। इतनी कम उम्र में उसने एक ऐसा AI डिवाइस तैयार किया है, जो न सिर्फ कहानियां बना सकता है बल्कि उन्हें अपनी आवाज में सुना भी सकता है। खास बात यह है कि यह सिस्टम इंटरनेट या किसी बाहरी सर्वर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि छोटे से हार्डवेयर पर ही काम करता है।
लक्षवीर का यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कम लागत वाले उपकरणों के जरिए भी नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। इस छोटे इनोवेटर की तकनीकी सोच ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
छोटे से माइक्रोकंट्रोलर में छिपी बड़ी AI ताकत
लक्षवीर ने करीब ₹760 कीमत वाले ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर की मदद से यह अनोखा डिवाइस तैयार किया है। इसकी खासियत यह है कि पूरा AI सिस्टम डिवाइस के अंदर ही काम करता है।
यह डिवाइस:
आवाज के जरिए कमांड समझता है।
खुद नई कहानियां तैयार करता है।
टेक्स्ट को आवाज में बदलकर सुनाता है।
छोटी-छोटी एनिमेशन भी दिखाता है।
सबसे खास बात यह है कि इसके लिए इंटरनेट कनेक्शन या क्लाउड सर्वर की जरूरत नहीं पड़ती।
ऐसे काम करता है AI कहानीकार
इस प्रोजेक्ट में ESP32-S3 के साथ INMP441 माइक्रोफोन, I2S स्पीकर और MAX98357A एम्प्लीफायर का इस्तेमाल किया गया है। इन सभी हार्डवेयर की मदद से यूजर सिर्फ बोलकर डिवाइस को कंट्रोल कर सकता है। "प्ले", "पॉज", "रिज्यूम" या "नई कहानी सुनाओ" जैसे कमांड देने पर यह तुरंत प्रतिक्रिया देता है। यानी बच्चे के हाथ में एक ऐसा छोटा AI असिस्टेंट है, जो खुद कहानियां बना और सुना सकता है।
ओपन-सोर्स AI मॉडल से तैयार किया शानदार प्रोजेक्ट
लक्षवीर ने अपनी AI तकनीक को शून्य से बनाने के बजाय TinyStories LLM नाम के ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को आधार बनाया। इस मॉडल को ESP32 जैसे छोटे हार्डवेयर पर चलने के लिए तैयार किया गया था। लक्षवीर ने इसमें वॉइस कंट्रोल, कहानी सुनाने की सुविधा और एनिमेटेड रिस्पॉन्स जोड़कर इसे एक इंटरैक्टिव AI डिवाइस में बदल दिया। डेमो के दौरान जब उसे "एक मजेदार कहानी बनाओ" कहा गया, तो डिवाइस ने कुछ ही समय में कहानी तैयार की, उसे आवाज में सुनाया और स्क्रीन पर एनिमेशन भी दिखाए।
AI एजेंट भी बना चुका है 8 साल का यह इनोवेटर
लक्षवीर का यह पहला बड़ा प्रोजेक्ट नहीं है। उसने PBLClaw नाम का एक और AI सिस्टम भी बनाया है, जो नेचुरल लैंग्वेज कमांड के जरिए ESP32 डिवाइस के लिए कोड तैयार कर सकता है। उसके पिता कैप्टन वेंकट ने इस प्रोजेक्ट को शेयर करते हुए बताया कि यूजर सिर्फ अपनी जरूरत बताता है, जिसके बाद सिस्टम खुद कोड बनाता है, उसे डिवाइस में अपलोड करता है और रन कर देता है।
टेक कम्युनिटी ने की जमकर तारीफ
लक्षवीर के काम को टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों ने काफी सराहा है। कई लोगों ने कहा कि जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे बेसिक चीजें सीख रहे होते हैं, उस उम्र में लक्षवीर AI एजेंट और हार्डवेयर सिस्टम तैयार कर रहा है। लोगों ने उसके पिता की भूमिका की भी तारीफ की और कहा कि सही मार्गदर्शन और सीखने का माहौल बच्चों की प्रतिभा को नई दिशा दे सकता है।
PBLClaw has crossed Level 1.
8-yo Lakshveer built an autonomous agent for ESP32 that writes and uploads code, then runs the device - controlled entirely through natural language via Telegram. You describe what you want. It builds. It flashes. It runs. Any device. On the fly. https://t.co/Con6olqm8rpic.twitter.com/WQaoi7e11v — Capt Venkat (@CaptVenk) March 1, 2026
200 से ज्यादा प्रोजेक्ट कर चुका है पूरा
लक्षवीर अब तक करीब 200 टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट पूरे कर चुका है। इनमें ESP32 कैमरा सिस्टम, वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसर आधारित डिवाइस शामिल हैं। वह अपने पिता के साथ मिलकर Projects by Laksh, Circuit Heroes और Chhota Creator जैसी पहलों पर भी काम कर रहा है, जिनका उद्देश्य बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और प्रोग्रामिंग से जोड़ना है।
छोटे डिवाइस में AI का बड़ा भविष्य
लक्षवीर का AI स्टोरीटेलर दिखाता है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए हमेशा बड़े सर्वर या महंगे सिस्टम की जरूरत नहीं है। ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर और सस्ते हार्डवेयर की मदद से छोटे डिवाइस भी स्मार्ट और उपयोगी बन सकते हैं। हालांकि इसमें अभी आवाज की गुणवत्ता सुधारने की गुंजाइश है, लेकिन यह प्रोजेक्ट आने वाले समय की संभावनाओं की एक झलक जरूर देता है।