दक्षिण-पूर्वी चीन के गुआंगडोंग प्रांत के फोशान शहर से एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है। यहां दुर्लभ ब्लड कैंसर से जूझ रही 'लिटिल ली' नाम की एक 24 वर्षीय युवती अस्पताल में अकेले अपना इलाज करा रही थी। अपनी बीमारी और अकेलेपन के बीच उसने एक फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए मदद मांगी। इसके बाद डिलीवरी राइडर्स की दरियादिली ने उसे नई जिंदगी और उम्मीद दी है।
अस्पताल में क्यों अकेली थी ली?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ली के कैंसर का उपचार जारी है और वह कीमोथेरेपी के चार दौर पूरे कर चुकी है। हालांकि उसकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उसे अस्पताल में देखभाल की जरूरत बनी रहती है। ली के साथ उसका कोई परिवार नहीं था क्योंकि उसके पिता इलाज का खर्च उठाने के लिए घर से दूर काम कर रहे हैं, और उसका छोटा भाई अपनी इंटर्नशिप में व्यस्त है।
बीते 15 अप्रैल को ली ने डिलीवरी ऐप के जरिए एक बेहद असामान्य ऑर्डर दिया। उसने किसी खाने या सामान की मांग नहीं की, बल्कि राइडर से अनुरोध किया कि वह दो घंटे उसके पास आकर बैठे। जिस राइडर ने यह रिक्वेस्ट स्वीकार की, उसने ली की स्थिति को स्थानीय डिलीवरी वर्कर्स के ग्रुप में साझा किया। इसके बाद जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। अपनी शिफ्ट खत्म करने के बाद कई राइडर्स स्वेच्छा से ली से मिलने अस्पताल पहुंचने लगे।
अस्पताल पहुंचने वाले राइडर्स अपने साथ दूध, स्नैक्स, भरवां खिलौने (स्टफ्ड टॉयज) और किताबें लेकर आए। कुछ राइडर्स ने ली से बात कर उसका समय बिताया, तो कुछ ने उससे मिलने के लिए अपना शेड्यूल तक बदल दिया चेन नाम के राइडर ने बताया कि ली के पास उसका परिवार हर समय नहीं रहता। मुझे उसके प्रति सहानुभूति महसूस हुई, इसलिए मैं उससे मिलने आया। युन्नान के एक राइडर ने ऑनलाइन सर्विस के जरिए उसे फूल भेजे।
ग्वांगझू के हुआंग नामक राइडर ने उससे मिलने के लिए करीब तीन घंटे का सफर तय किया। राइडर्स की इस निस्वार्थ सेवा का असर ली की सेहत पर भी दिखा। भर्ती होने के समय वह काफी गुमसुम थी, लेकिन लगातार लोगों के मिलने आने से उसका मूड सुधरा और उसने नियमित रूप से खाना शुरू कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में इमोशनल ली को कोट किया गया है। वह कहती हैं कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतने लोग मुझे प्रोत्साहित करने आएंगे। उन्होंने निस्वार्थ भाव से मेरा साथ दिया और मैं इससे बहुत प्रभावित हूं।"
जैसे ही यह कहानी वायरल हुई, समाज के अन्य लोग भी आगे आए। एक पुलिस अधिकारी ने उससे मिलकर अपने काम की बातें साझा कीं, तो वहीं वांग नाम की एक 60 वर्षीय कैंसर सर्वाइवर ने भी उससे मिलकर हिम्मत बढ़ाई।