सीपीआर के बारे में बता रहे टीचर को ही आया कार्डियक अरेस्ट, फिर उनके स्टूडेंट्स ने जो सीखा उसी को अप्लाई कर बचा ली उनकी जान

विस्कॉन्सिन में एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान 72 वर्षीय इंस्ट्रक्टर कार्ल अर्प्स को असली दिल का दौरा पड़ गया, जिसे छात्र पहले उनकी एक्टिंग समझ रहे थे। स्थिति को भांपते ही छात्रों ने अपनी सीखी हुई सीपीआर (CPR) तकनीक का तुरंत इस्तेमाल किया और सही समय पर मदद देकर अपने ही शिक्षक की जान बचा ली।

अपडेटेड May 08, 2026 पर 1:43 PM
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विस्कॉन्सिन, अमेरिका के एप्लेटन में स्थित 'फॉक्स वैली टेक्निकल कॉलेज' में 25 मार्च का दिन किसी सामान्य दिन की तरह ही शुरू हुआ था। क्लास में 72 साल के अनुभवी इंस्ट्रक्टर कार्ल अर्प्स अपने छात्रों को इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) बनने की ट्रेनिंग दे रहे थे। उस दिन का विषय था कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) के लक्षणों को पहचानना और सीपीआर (CPR) के जरिए जान बचाना। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। क्लास में जो 'मॉक ड्रिल' (दिखावे का अभ्यास) चल रहा था, वह अचानक एक खौफनाक हकीकत में बदल गया।

एक्टिंग या हकीकत?

ट्रेनिंग के दौरान कार्ल अर्प्स एक एम्बुलेंस के अंदर छात्रों को दिखा रहे थे कि जब किसी को दिल का दौरा पड़ता है, तो वह कैसे व्यवहार करता है। वह सीने में दर्द की एक्टिंग कर रहे थे। अचानक, कार्ल का चेहरा पीला पड़ गया और वह सांस लेने के लिए तड़पने लगे। कुछ ही सेकंड में वह बेहोश हो गए।


शुरुआत में, छात्र लोगन लेहरर और उनके साथी छात्रों को लगा कि कार्ल अपनी एक्टिंग में बहुत डूब गए हैं। उन्हें लगा कि यह सब ट्रेनिंग का हिस्सा है ताकि छात्रों की सजगता को परखा जा सके। लेकिन जब कार्ल की सांसें रुकने लगीं और उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई, तब छात्रों को अहसास हुआ कि यह कोई ड्रामा नहीं, बल्कि एक असली मेडिकल इमरजेंसी है।

छात्रों ने पेश की मिसाल

जैसे ही छात्रों को समझ आया कि उनके गुरु की जान खतरे में है, उन्होंने एक पल भी गंवाए बिना अपनी सीखी हुई ट्रेनिंग को हकीकत में आजमाना शुरू किया। लोगन लेहरर, जो खुद एक फायरफाइटर हैं और ईएमटी की ट्रेनिंग ले रहे थे, उन्होंने तुरंत कमान संभाली।

छात्रों ने मिलकर अपने टीचर को एम्बुलेंस से बाहर निकाला और जमीन पर लिटाकर तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। उन्होंने कॉलेज के अन्य स्टाफ को बुलाया और एईडी (AED) मशीन का इस्तेमाल किया ताकि दिल की धड़कन को दोबारा शुरू किया जा सके। यह एक ऐसा पल था जहाँ 'सीखने वाले' ही 'जीवनदाता' बन गए थे।

एक नया जीवन

सौभाग्य से, छात्रों की फुर्ती और सही तकनीक ने काम किया। कार्ल अर्प्स को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने का श्रेय उन्हीं छात्रों को दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब कार्ल अपने छात्रों से मिले, तो वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "यह विडंबना ही है कि मैं उन्हें सिखा रहा था कि जान कैसे बचाई जाती है और उसी वक्त उन्होंने मेरी जान बचा ली।"

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