Bird Songs AI Study: AI ने सुनी 1.16 लाख चिड़ियों की आवाजें, वैज्ञानिकों को मिला चौंकाने वाला नतीजा
Bird Songs AI Study: पक्षियों की अलग-अलग आवाजें हमेशा से इंसानों के लिए रहस्य रही हैं। अब AI की मदद से वैज्ञानिकों ने हजारों पक्षियों की ध्वनियों का अध्ययन कर उनके गानों के पीछे छिपे एक खास पैटर्न का पता लगाया है। यह खोज पक्षियों के संवाद को समझने का नया रास्ता खोल सकती है
MoneyControl News
अपडेटेड Jul 27, 2026 पर 4:36 PM
AI एल्गोरिदम 3000 से अधिक सॉन्गबर्ड प्रजातियों में बार-बार आने वाले साउंड पैटर्न की पहचान करने में सक्षम रहा।
दुनियाभर में पक्षियों की चहचहाहट, सीटी और उनकी अलग-अलग की आवाजें सुनने में जितनी डाइवर्स और कॉम्प्लेक्स लगती हैं, उनके पीछे का विज्ञान उतना ही सरल और दिलचस्प निकला है। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पक्षियों की 1 लाख 16 हजार से अधिक आवाजों की स्टडी की है। इस स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। ये नतीजे पक्षियों के संवाद करने के तरीके को देखने का नजरिया बदल सकते हैं।
AI की स्टडी में क्या पता चला?
अलग अलग चिड़ियों के चहचहाट भले ही इनफाइनाइट डाइवर्सिटी से भरी दिखाई देती हो लेकिन AI बेस्ड एनालिसिस ने उन सभी के पीछे छिपे एक बहुत ही सरल पैटर्न को ढूंढ निकाला है। 3160 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों के 116000 से अधिक गानों की स्टडी से पता चला है कि करीब सभी पक्षी गीत सिर्फ 8 बुनियादी ध्वनि घटकों (Basic Acoustic Building Blocks) से मिलकर बने हैं।
रिसर्चर्स ने पाया कि दुनिया भर में पक्षियों द्वारा की जाने वाली अनगिनत चहचहाहट और आवाजों के बावजूद, कुछ पक्षी बार-बार इन्हीं 8 प्रकार की ध्वनियों को दोहराते रहते हैं। यह पैटर्न अलग-अलग महाद्वीपों और विभिन्न प्राकृतिक आवासों में रहने वाले पक्षियों में पाया गया है। इससे ये भी पता चला है कि पक्षियों के गानों के पीछे कुछ साझा नियम काम करते हैं।
क्या हैं ये 8 बुनियादी ध्वनियां?
वैज्ञानिकों के मुताबिक जिस तरह इंसान शब्दों को बनाने के लिए अक्षरों के एक निश्चित सेट का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह पक्षी भी अपने अनूठे गानों को तैयार करने के लिए इन 8 बुनियादी ध्वनियों को अलग-अलग संयोजनों में इस्तेमाल करते हैं।
AI ने पक्षियों के गानों को नीचे दिए गए 8 बुनियादी समूहों में बांटा है-
इस रिसर्च टीम ने AI एल्गोरिदम की मदद से पक्षियों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया जिन्हें Xeno-canto समेत कई सार्वजनिक डेटाबेस से एकत्र किया गया था। AI एल्गोरिदम 3000 से अधिक सॉन्गबर्ड प्रजातियों में बार-बार आने वाले साउंड पैटर्न की पहचान करने में सक्षम रहा। यह गानों वाली चिड़ियों पर अब तक किए गए सबसे बड़े अध्ययनों में से एक है।
पक्षियों की आवाजों में अंतर क्यों होता है?
शोध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पक्षियों के गानों के बुनियादी घटक भले ही एक जैसे हों लेकिन पर्यावरण और विकासवादी प्रक्रिया की वजह से उनमें भिन्नता आती है-
प्राकृतिक आवास: घने जंगलों में रहने वाले पक्षी साधारण गाने गाना पसंद करते हैं ताकि उनकी आवाज पेड़-पौधों और पत्तियों के बीच से आसानी से पार हो सके। इसके उलट खुले क्षेत्रों में रहने वाले पक्षी धीमे और अधिक विस्तृत गानों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
शारीरिक बनावट और व्यवहार: पक्षी के शरीर का आकार, उसकी चोंच का आकार, उनकी मेटिंग हैबिट और उनका क्षेत्र भी उनके गाने के तरीके को प्रभावित करते हैं।
यह शोध पक्षियों के संचार और उनके गानों के क्रमिक विकास के बारे में नई जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ प्रकृति में छिपे ऐसे पैटर्न की खोज करने में AI की क्षमता का सबूत माना जा रहा है, जिन्हें एक समय पहचानना बेहद कठिन था।