1977 में टाटा ने दी थी 960 रुपये सैलरी! सिंडिकेट बैंक के पूर्व चेयरमैन ने शेयर किया अपना पहला जॉब ऑफर लेटर

हर कोई चाहता है कि करियर की शुरुआत शानदार सैलरी और बड़े मौके से हो, लेकिन सफलता का रास्ता हमेशा ऐसा नहीं होता। कई बार छोटा-सा फैसला ही भविष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाता है। एक पूर्व बैंक चेयरमैन की पुरानी याद ने आज के युवाओं के बीच करियर और सफलता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है

अपडेटेड Aug 06, 2026 पर 1:59 PM
नानावटी ने बताया कि उनके पिता एक MNC कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर थे।

हर किसी की सफलता के पीछे एक ऐसी कहानी होती है, जिसे देखकर यह समझ आता है कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। करियर की शुरुआत में अक्सर लोग बड़ी सैलरी और शानदार पद की उम्मीद करते हैं, लेकिन कई बार छोटे मौके ही भविष्य की सबसे बड़ी उपलब्धियों की नींव बन जाते हैं। हाल ही में एक सिंडिकेट बैंक के पूर्व चेयरमैन ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक अनुभव साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

उनकी कहानी सिर्फ पहली नौकरी या सैलरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सही समय पर लिया गया एक फैसला इंसान की पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। यही वजह है कि उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और युवा पेशेवरों के बीच करियर, सीख और सफलता को लेकर नई चर्चा छेड़ रही है।

सिर्फ ₹960 की नौकरी, लेकिन पिता की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी


अमेरिका से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे अजय नानावटी को भरोसा था कि उन्हें शानदार पैकेज वाली नौकरी मिलेगी। लेकिन जब पहली नौकरी का ऑफर हाथ में आया, तो मासिक वेतन सिर्फ 960 रुपये था। यह देखकर उन्हें निराशा हुई और परिवार भी कुछ पल के लिए हैरान रह गया।

पिता ने कहा- सैलरी नहीं, मौका देखो

नानावटी ने बताया कि उनके पिता एक MNC कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर थे। पढ़ाई पर काफी खर्च करने के बाद भी उन्होंने बेटे से सिर्फ इतना कहा कि यह नौकरी स्वीकार कर लो। उस समय यह सलाह साधारण लगी, लेकिन बाद में यही फैसला उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बन गया।

OFFER LETTERटाटा का ऑफर, जिसने बदल दी सोच

4 जुलाई 1977 को टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की ओर से उन्हें असिस्टेंट कमर्शियल ऑफिसर के पद का ऑफर मिला। नियुक्ति पत्र में यह भी स्पष्ट था कि जरूरत पड़ने पर उन्हें भारत या विदेश में कहीं भी काम करना पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने बिना ज्यादा सोच-विचार के यह अवसर स्वीकार कर लिया।

ज्यादा सैलरी वाले ऑफर भी थे, फिर भी टाटा क्यों चुना?

नानावटी के मुताबिक, उस समय उनके पास बेहतर वेतन वाली दूसरी नौकरियों के विकल्प मौजूद थे। लेकिन उन्होंने पैसे से ज्यादा सीखने और एक प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने के अवसर को महत्व दिया। उनका मानना था कि सही माहौल इंसान को आगे बढ़ने का मौका देता है।

49 साल बाद बोले- यही था सबसे सही फैसला

आज, लगभग पांच दशक बाद, नानावटी मानते हैं कि अगर उस समय उन्होंने सिर्फ सैलरी को प्राथमिकता दी होती, तो शायद उनका करियर अलग दिशा में जाता। उनके अनुसार, शुरुआती सालों में अनुभव, सीख और सही मार्गदर्शन भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं।

वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहस

नानावटी की पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी पहली नौकरी और शुरुआती सैलरी की कहानियां साझा कीं। किसी ने 60 रुपये महीने से शुरुआत की, तो किसी ने कुछ सौ रुपये की नौकरी को याद किया। इस चर्चा ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया करियर की शुरुआत में ज्यादा जरूरी क्या है, मोटी सैलरी या बेहतर सीख?

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