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'लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसका नाड़ा तोड़ना रेप नहीं': HC की ट‍िप्पणी पर बवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

Allahabad HC Sparks Debate: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि महिला के स्तन को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना किसी अपराधी पर बलात्कार या बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Mar 20, 2025 पर 3:51 PM
'लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसका नाड़ा तोड़ना रेप नहीं': HC की ट‍िप्पणी पर बवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
Allahabad HC Sparks Debate: हाई कोर्ट के इस टिप्पणी पर लोगों ने नाराजगी जताई है

Allahabad HC Sparks Debate: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक विवादित ट‍िप्पणी पर लोगों ने नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि किसी लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना रेप या रेप की कोशिश का आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह केवल यौन उत्पीड़न की कैटेगरी में आता है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का ये फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। यह ट‍िप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्‍ट‍िस राम मनोहर नारायण म‍िश्रा ने यूपी के कासगंज के पट‍ियाली थाने में दर्ज मामले में आकाश और पवन की याच‍िका पर की।

'दैनिक भास्कर' की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र ने अपने आदेश में कहा, "पीड़िता के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना, उसे पुलिया के नीचे खींचकर ले जाने की कोशिश करना रेप या रेप की कोशिश नहीं मान सकते।"

एक पुनरीक्षण याच‍िका में स्‍पेशल जज पॉक्‍सो एक्‍ट कासगंज के सम्‍मन आदेश को चुनौती दी गई थी। दो आरोपियों पवन और आकाश को कासगंज की एक अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार) और पॉक्सो एक्ट की धारा 18 के तहत 11 वर्षीय लड़की के साथ कथित रूप से बलात्कार करने के आरोप में मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया था। आकाश ने कथित तौर पर उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की।

हालांकि, राहगीरों ने बीच-बचाव किया और आरोपी मौके से भागने पर मजबूर हो गए। इससे पीड़िता वहीं रह गई। ट्रायल कोर्ट ने पाया कि यह मामला बलात्कार के प्रयास का है। यह POCSO एक्टर के साथ-साथ IPC की धारा 376 के दायरे में आता है। हालांकि, आरोपी ने आदेश को चुनौती दी और इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया।

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