बिहार के कटिहार जिले से सामने आया ये मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने सरकारी व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनिहारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर पंचायत में कार्यरत आंगनबाड़ी सेविका प्रेमलता हेंब्रम की हालत उस समय बेहद खराब थी, जब उन्हें बीमारी के बावजूद केंद्र पहुंचने को मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद नौकरी और वेतन को लेकर बने दबाव के कारण उन्हें ये कदम उठाना पड़ा।
इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ये मामला अब केवल एक कर्मचारी की परेशानी नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर दबाव, अधिकारों और इंसानियत के संतुलन पर एक बड़ा सवाल बन चुका है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रेमलता के पति उन्हें सहारा दे रहे हैं, जबकि उनके हाथ में सलाइन (IV) लगी हुई है। ये दृश्य देखकर लोग हैरान रह गए कि एक बीमार महिला को इस हालत में काम पर आना पड़ा।
निरीक्षण के बाद बढ़ा दबाव
बताया जा रहा है कि कुछ दिनों से बीमार रहने के कारण वो छुट्टी पर थीं। इसी दौरान बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) वीणा भारती ने केंद्र का निरीक्षण किया और अनुपस्थित पाए जाने पर उन्हें तुरंत हाजिर होने का आदेश दे दिया।
मजबूरी में टूटी तबीयत के साथ पहुंचीं केंद्र
नौकरी और वेतन खोने के डर से प्रेमलता को अस्पताल छोड़कर केंद्र आना पड़ा। हालत इतनी खराब थी कि उन्हें उनके पति सहारा देकर लेकर आए और सलाइन की बोतल भी खुद संभाली।
सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर
ये वीडियो वायरल होते ही लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। यूजर्स ने इसे “सिस्टम की संवेदनहीनता” बताया और अधिकारी के रवैये पर सवाल उठाए। कई लोगों ने कार्रवाई की मांग भी की है।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
फिलहाल इस मामले पर अधिकारी की ओर से कोई बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोग और कर्मचारी संगठन जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बीमार कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार बिल्कुल गलत है।
ये घटना सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जहां कई बार नियम इंसानियत पर भारी पड़ जाते हैं। अब सवाल यह है कि क्या ऐसे हालात में भी संवेदनशीलता दिखाई जाएगी?