अंकुर वारिकू ने बताया ड्राइवर को क्यों देते हैं 53 रुपये हजार सैलरी, वजह जानकर लोग हुए हैरान

लेखक और उद्यमी अंकुर वारिकू की एक लिंक्डइन पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। पोस्ट में उन्होंने अपने परिवार के साथ लंबे समय से जुड़े एक कर्मचारी के प्रति भरोसे और सम्मान की बात कही। इस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं और देखते ही देखते यह पोस्ट बहस का विषय बन गई

अपडेटेड Aug 05, 2026 पर 8:43 AM
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पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इसका समर्थन किया।

लेखक और उद्यमी अंकुर वारिकू की एक लिंक्डइन पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में उन्होंने अपने परिवार के साथ लंबे समय से काम कर रहे एक कर्मचारी के बारे में बात करते हुए भरोसे, सम्मान और लंबे समय तक निभाए गए पेशेवर रिश्तों की अहमियत बताई। वारिकू का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की असली कीमत सिर्फ उसके काम से नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी, जिम्मेदारी और भरोसे से तय होती है। उनकी इस सोच को कई लोगों ने प्रेरणादायक बताया, जबकि कुछ लोगों ने इससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी सवाल उठाए। पोस्ट सामने आने के बाद लिंक्डइन समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस विषय पर बहस शुरू हो गई।


कई यूजर्स ने इसे कर्मचारियों के प्रति सम्मान की मिसाल बताया, वहीं कुछ ने कहा कि ऐसे रिश्तों में दोनों पक्षों का योगदान बराबर होता है। यही वजह है कि वारिकू की यह पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।

अब सिर्फ ड्राइवर नहीं, परिवार के भरोसेमंद साथी हैं

वारिकू ने बताया कि दयानंद की भूमिका अब केवल गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं है। वो बच्चों को स्कूल और क्लास छोड़ने-लाने का काम करते हैं, परिवार के जरूरी काम निपटाते हैं और घर की डुप्लीकेट चाबियां भी उनके पास रहती हैं। उन्होंने लिखा कि दयानंद ऐसे इंसान हैं, जिन पर वह अपने परिवार और अपनी सुरक्षा को लेकर आंख बंद करके भरोसा कर सकते हैं। इसी वजह से वह उन्हें सिर्फ ड्राइवर नहीं, बल्कि परिवार का भरोसेमंद साथी मानते हैं।

अनुशासन और ईमानदारी ने बनाया खास

वारिकू ने दयानंद की आदतों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि दयानंद रोज सुबह 4:30 बजे उठते हैं, रात 8:30 बजे सो जाते हैं, कभी देर से नहीं आते और हमेशा सकारात्मक सोच के साथ काम करते हैं। उनके मुताबिक, दयानंद सिर्फ गाड़ी नहीं चलाते, बल्कि परिवार का काफी समय बचाते हैं, कई जिम्मेदारियां संभालते हैं और रोजमर्रा की चिंताओं को भी कम कर देते हैं। बदले में उन्होंने कभी बड़ी मांग नहीं की, सिर्फ भरोसा चाहा और परिवार ने उन्हें वही दिया।

वारिकू ने क्यों कहा- 'सबसे अच्छा निवेश'?

वारिकू का कहना है कि मेहनती और भरोसेमंद लोगों पर खर्च किया गया पैसा कभी बेकार नहीं जाता। उन्होंने लिखा कि दयानंद उनके पैसों का सबसे अच्छा निवेश साबित हुए हैं। उनका मानना है कि जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं, उनके साथ उदार व्यवहार करना जीवन की सबसे अच्छी निवेशों में से एक है।

कई लोगों ने वारिकू की सोच की तारीफ की

पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इसका समर्थन किया। एक यूजर ने बताया कि उनके घर में काम करने वाली महिला पिछले 15 साल से परिवार के साथ है और अब उसे घर की चाबियां भी सौंप दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि अब वह कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा जैसी हैं। दूसरे लोगों ने भी लिखा कि भरोसेमंद ड्राइवर और घरेलू कर्मचारी कामकाजी लोगों का काफी समय और मानसिक तनाव कम कर देते हैं। एक यूजर ने लिखा कि उदारता कोई खर्च नहीं, बल्कि भरोसे में किया गया लंबी अवधि का निवेश है। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने इसे विश्वास और सम्मान से बने मजबूत रिश्ते का बेहतरीन उदाहरण बताया।

लेकिन सभी लोग सहमत नहीं थे

हालांकि, कई लोगों ने वारिकू की बात पर सवाल भी उठाए। एक टिप्पणी, जिसे काफी लोगों का समर्थन मिला, उसमें कहा गया कि असली निवेश वारिकू ने नहीं बल्कि दयानंद ने किया है। यूजर ने लिखा कि वारिकू सिर्फ सैलरी दे रहे हैं, जबकि दयानंद ने 13 साल तक मेहनत, ईमानदारी और भरोसे के दम पर यह रिश्ता बनाया है। इसलिए अगर किसी ने निवेश किया है, तो वह दयानंद हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल इस भरोसे को कमाने में लगाए।

सैलरी को लेकर भी उठे सवाल

एक अन्य लिंक्डइन यूजर ने लिखा कि 13 साल तक बिना देर किए और पूरी ईमानदारी से काम करने वाले व्यक्ति को ₹53,350 की सैलरी देकर उसे उदारता कहना सही नहीं लगता। उनके मुताबिक, इतनी लंबी सेवा और वफादारी के बाद यह रकम बहुत ज्यादा नहीं कही जा सकती। इसी वजह से वारिकू की पोस्ट पर भरोसे, सम्मान, वेतन और कर्मचारियों की सही कीमत जैसे मुद्दों पर लंबी बहस शुरू हो गई।

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