भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में कई ऐसी जनजातियां हैं जिनकी जीवनशैली, संस्कृति और रहन-सहन आम लोगों से बिलकुल अलग और अनोखा होता है। ऐसी ही एक रोमांचक जनजाति है बाजाऊ, जिन्हें दुनिया में सी नोमैड्स यानी समुद्र के खानाबदोश कहा जाता है। बाजाऊ लोग मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस के तटीय इलाकों में पाए जाते हैं और इनका पूरा जीवन समंदर के आस-पास ही गुजरता है। इनके पास ज़्यादातर स्थायी घर नहीं होते बल्कि नाव ही इनका घर होती है। ये लोग पीढ़ियों से नावों पर रहकर मछली पकड़ना, समुद्री जीवों को इकठ्ठा करना और गहराई में बिना किसी आधुनिक उपकरण के गोता लगाना जानते हैं।
बाजाऊ जनजाति का समंदर से रिश्ता सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है बल्कि उनके लिए समुद्र एक जीवित शक्ति है, जिसे वो अपनी आत्मा मानते हैं। विज्ञान भी इनकी अद्भुत क्षमताओं को देखकर हैरान रह गया है।
नाव ही घर, समंदर ही जिंदगी
बाजाऊ समुदाय के कई परिवारों के पास पक्के घर नहीं होते। उनके लिए नाव ही उनका घर, रसोई और आरामगाह होती है। मछलियां पकड़ना, सीफूड इकट्ठा करना और गहराई में गोता लगाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। ये लोग हफ्तों तक समंदर में रह सकते हैं और पानी की लहरों के साथ ही जीते हैं।
जहां हम और आप आधुनिक उपकरणों के सहारे पानी के नीचे झांकने की कोशिश करते हैं, वहीं बाजाऊ लोग बिना किसी ऑक्सीजन सिलेंडर या मशीन के 70 मीटर तक डाइव कर लेते हैं। ये कमाल उनकी खास शारीरिक बनावट की वजह से संभव हो पाता है।
कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च ने साबित किया कि बाजाऊ लोगों की तिल्ली सामान्य इंसान से करीब 50% बड़ी होती है। तिल्ली का काम शरीर में ऑक्सीजन युक्त खून को स्टोर करना होता है। जब बाजाऊ गहरे पानी में जाते हैं तो ये तिल्ली शरीर में ऑक्सीजन रिलीज कर देती है, जिससे वे ज्यादा देर तक पानी में रह सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि बाजाऊ के जीन में कुछ ऐसे खास बदलाव हैं, जो शरीर को कम ऑक्सीजन में भी सामान्य बनाए रखते हैं। PDE10A और BDKRB2 जैसे जीन उनके शरीर को गहराई और पानी के दबाव के मुताबिक ढाल देते हैं। यही वजह है कि बिना किसी डर के ये लोग समुद्र की गहराइयों में उतर जाते हैं।
बाजाऊ समुदाय के लिए समंदर सिर्फ आजीविका का साधन नहीं बल्कि उनके अस्तित्व का आधार है। वो समुद्र को एक जीवित शक्ति मानते हैं और इसकी पूजा भी करते हैं। हर डाइव उनके लिए केवल काम नहीं, बल्कि एक तरह का आध्यात्मिक अनुभव होता है।
बदलती दुनिया में संकट में बाजाऊ की परंपरा
वैश्विक बदलाव, जलवायु परिवर्तन और मछलियों की घटती तादाद ने बाजाऊ के पारंपरिक जीवन को खतरे में डाल दिया है। अब कई युवा बाजाऊ शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, ताकि स्थायी घर, शिक्षा और रोजगार पा सकें। धीरे-धीरे बाजाऊ का अनोखा समुद्री जीवन इतिहास बनने की कगार पर पहुंच रहा है।