त्योहारों के मौके पर मेहंदी लगाए बिना महिलाओं का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। गोरिंटाकू (Gorintaku) मेहंदी डिजाइन रक्षाबंधन और तीज जैसे खास अवसरों पर अगर आप कम समय में यूनिक और खूबसूरत मेहंदी डिजाइन चाहती हैं, तो यह पारंपरिक (traditional) तरीका आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। इसमें मेहंदी कोन या बारीक डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती, फिर भी हाथों पर नेचुरल, अट्रेक्टिव और सबसे अलग पैटर्न उभरकर आता है:
त्योहारों पर अपनाएं गोरिंटाकू स्टाइल मेहंदी
ताजी मेहंदी, फूल और पत्ती से बनता है डिजाइन
इस ट्रेडिशनल टेक्निक (traditional technique) में बारीक डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं होती। हथेली के बीच में कोई ताजा फूल या सुंदर पत्ती रखी जाती है। इसके बाद उसके ऊपर और चारों तरफ ताजी पिसी हुई मेहंदी (Mehndi) का गाढ़ा पेस्ट गोल आकार में लगाया जाता है। चाहें तो उंगलियों के पोरों पर भी मेहंदी लगाई जाती है।
सूखने के बाद उभरता है खूबसूरत नेचुरल पैटर्न
मेहंदी पूरी तरह सूखने के बाद फूल या पत्ती को हटा दिया जाता है। जिस जगह फूल या पत्ती रखी गई होती है, वहां रंग नहीं चढ़ता और गहरे लाल-भूरे रंग की मेहंदी के बीच उसकी साफ और सुंदर शेप उभरकर दिखाई देती है। यही इस टेक्निक की सबसे खास पहचान है।
सिर्फ 10 मिनट में तैयार हो जाता है फेस्टिव लुक
आजकल जहां ब्राइडल (bridal) और अरेबिक मेहंदी (Arabic Mehndi) डिजाइन बनाने में काफी समय लगता है, वहीं इस पारंपरिक तरीके (traditional method) में करीब 10 मिनट में मेहंदी लग जाती है। इसलिए अगर रक्षाबंधन या तीज की तैयारियों के बीच समय कम हो, तो भी आप आसानी से खूबसूरत मेहंदी लुक पा सकती हैं।
केमिकल वाले कोन से बेहतर नेचुरल ऑप्शन
इस टेक्निक में ताजी पिसी हुई मेहंदी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए यह केमिकल वाले मेहंदी कोन (Mehndi cone) की तुलना में ज्यादा नेचुरल ऑप्शन माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि ताजी मेहंदी हाथों को ठंडक भी देती है, जिससे इसे लगाना और भी कम्फर्टेबल महसूस होता है।
हर बार मिलेगा अलग और यूनिक डिजाइन
इस ट्रडिशनल मेहंदी स्टाइल (mehndi style) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर बार इस्तेमाल होने वाला फूल या पत्ती अलग होती है। इसलिए हर डिजाइन भी अलग और यूनिक बनता है।