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Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की 'घास ट्रेन', सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ

Bihar Train News: हर साल, जब बिहार के खगड़िया जिले में भीषण बाढ़ आती है तो इलाके में एक अनोखी ट्रेन चर्चा का विषय बन जाती है। हालांकि, भारतीय रेलवे रिकॉर्ड में इसका नाम समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, फकिया इलाके के लोग इसे प्यार से 'घास वाली ट्रेन' भी कहते हैं

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Aug 30, 2026 पर 9:33 PM
Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की 'घास ट्रेन', सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ
Photo Story: बाढ़ आते ही बिहार की यह स्पेशल ट्रेन सुबह चारे की तलाश में निकल जाती है (तस्वीर: News18 Hindi)

Bihar Train News: बिहार के खगड़िया जिले में जब बाढ़ दस्तक देती है, तो एक खास पैसेंजर ट्रेन इलाके में चर्चा का विषय बन जाती है। 'न्यूज 18' के मुताबिक, हालांकि इंडियन रेलवे के रिकॉर्ड में इस ट्रेन का नाम 'समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर' है। लेकिन स्थानीय लोग इसे प्यार से 'घास ट्रेन' भी कहते हैं। बाढ़ के मुश्किल दिनों में यह ट्रेन सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम नहीं करती। बल्कि सैकड़ों पशुपालकों और उनके मवेशियों के लिए 'लाइफलाइन' बन जाती है।

जब हर तरफ पानी भर जाता है तब सैकड़ों पशुपालक सुबह-सुबह इस पैसेंजर ट्रेन में सवार होकर सूखे इलाकों की ओर जाते हैं। वे चिलचिलाती धूप में अपने मवेशियों के लिए हरा चारा काटते हुए दिन बिताते हैं। फिर शाम को वे सभी भारी बंडलों के साथ रेलवे स्टेशन लौट आते हैं।

बाढ़ में मवेशियों के सामने चारे का संकट

रिपोर्ट के मुताबिक, खगड़िया के मानसी प्रखंड के निचले इलाकों में हर साल बाढ़ का पानी भर जाता है। इस दौरान धमसारा घाट, मटिहानी और रोहियार जैसे गांवों के आसपास के बड़े हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। खेत और चरागाह पानी में डूब जाते हैं। पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मवेशियों के लिए हरे चारे का इंतजाम करना होती है। मवेशियों पर निर्भर परिवारों के लिए उन्हें भूखा रखना संभव नहीं होता। ऐसे में पशुपालक रोजाना बाढ़ प्रभावित इलाके से बाहर निकलकर सूखे एरिया का रुख करते हैं, जहां उन्हें हरा चारा मिल सके।

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