अपनी हरी-भरी घास और खूबसूरत पार्कों के लिए मशहूर ब्रिटेन का नजारा इस बार बदला हुआ है। ब्रिटेन में पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने इसकी मनमोहक हरियाली पर काफी असर डाला है और यहां की घास हरी से पीली, भूरी और सुनहरी रंग की दिखने लगी हैं। इंग्लैंड में इस बार 190 वर्षों में सबसे सूखा जुलाई देखने को मिला है जबकि वेल्स ने भी अपने इतिहास का सबसे सूखा जुलाई देखा। इस वजह से देश के लॉन, पार्क और खेत सूख रहे हैं।
यूके सरकार के मुताबिक महीनों तक बेहद कम बारिश और हाई टेंप्रेचर के बाद 10 अगस्त तक इंग्लैंड का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर सूखे की चपेट में आ चुका था। इस जल संकट ने नदियों, जलाशयों, कृषि योग्य भूमि और वन्यजीवों पर काफी असर डाला है।
क्यों पीली पड़ रही है हरी घास?
घास के रंग में आया यह बदलाव मुख्य रूप से पौधों का सर्वाइवल रिस्पॉन्स है। जब मिट्टी काफी सूख जाती है तो घास का बढ़ना रुक जाता है और वो डॉर्मेंट स्टेट में चली जाती है। जब घास पानी और एनर्जी बचाने की कोशिश करती है तो उसकी पत्तियां अपना स्वस्थ हरा रूप खो देती हैं और पीली, भूरी या पुआल के रंग की हो जाती हैं। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी के मुताबिक स्थापित लॉन अक्सर सूखे के लंबे दौर में भी जीवित रह सकते हैं क्योंकि सतह के नीचे उनकी जड़ें जीवित रहती हैं। जैसे ही बारिश लौटती है, उनमें फिर से नई हरी पत्तियां निकल आती हैं। फिर भी मौजूदा स्थितिइतनी गंभीर है कि कुछ क्षेत्रों में स्थायी नुकसान हो सकता है। अगर सूखा जारी रहता है तो घास कमजोर हो सकती है और जड़ें खराब हो सकती हैं।
किसानों, जलाशयों और जल आपूर्ति पर पड़ा भारी असर
इस सूखे मौसम का सीधा असर ब्रिटेन के किसानों पर भी पड़ रहा है। इंग्लैंड की पर्यावरण एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि घास की पैदावार घटने के कारण पशुपालक किसानों को समय से पहले ही सर्दियों के लिए रखा गया चारा इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों को समय से पहले फसलों की कटाई करनी पड़ रही है, फसल की पैदावार कम हो रही है और खेतों में आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है।
बारिश की कमी का आंकड़ा बेहद हैरान करने वाला है
जुलाई महीने में इंग्लैंड में केवल 6।5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो कि उसके दीर्घकालिक औसत का मात्र 10 प्रतिशत है। दक्षिणी इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में पूरे महीने लगभग न के बराबर बारिश हुई। देश में जलाशयों का जलस्तर काफी गिर गया है, नदियों का प्रवाह असामान्य रूप से कम है और लाखों लोग पानी के उपयोग पर लगी पाबंदियों से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सूखे के हालातों को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा की है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अपने घर के लॉन में हर कीमत पर घास को हरा रखने की जिद न करें। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी का कहना है कि भूरी हुई घास बारिश लौटने पर प्राकृतिक रूप से ठीक हो सकती है जबकि सूखे के दौरान ज्यादा सिंचाई करने से सीमित जल आपूर्ति पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ेगा।