क्या ऊंट सच में निगलता है जिंदा सांप? इस खतरनाक इलाज का सच जानकर आपके होश उड़ जाएंगे!

Camel Interesting Facts: ऊंट को जिंदा और जहरीला सांप खिलाया जाना सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन इसके पीछे एक खास कारण होता है। यह परंपरा ऊंट की सेहत से जुड़ी होती है, जिसे कुछ जगहों पर आज भी अपनाया जाता है। चलिए जानते हैं इस अनोखी प्रथा के पीछे की सोच

अपडेटेड Jun 28, 2025 पर 10:12 AM
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Camel Interesting Facts: ऊंट के मालिक पहले उसके मुंह को खोलते हैं, फिर जिंदा सांप को उसके मुंह में डालते हैं।

ऊंट को 'रेगिस्तान का जहाज' यूं ही नहीं कहा जाता। ये जानवर बेहद कठिन परिस्थितियों में भी जीने की क्षमता रखता है। तपते रेगिस्तान में जहां पानी की एक बूंद मिलना मुश्किल हो, वहां ऊंट कई-कई दिन बिना पानी और खाना खाए जिंदा रह सकता है। उसकी लंबी टांगें, मोटी चमड़ी और पानी जमा करने की क्षमता उसे रेगिस्तान के लिए उपयुक्त बनाती हैं। इतना ही नहीं, ऊंट एक बार में 100 से 150 लीटर तक पानी पी सकता है और जरूरत पड़ने पर तेज रफ्तार से दौड़ भी सकता है। लेकिन इस शांत और शाकाहारी दिखने वाले जानवर की एक आदत जानकर आप चौंक जाएंगे—ऊंट बीमार होने पर जिंदा और जहरीले सांप को निगल जाता है।

सुनने में भले ही ये अजीब लगे, लेकिन ये एक पारंपरिक इलाज का हिस्सा है जिसे सदियों से ऊंट पालकों द्वारा अपनाया जाता रहा है। आइए, जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी।

ऊंट खाता है जिंदा कोबरा


हां, ये सुनकर चौंकना स्वाभाविक है। ऊंट, जो आमतौर पर एक शाकाहारी जीव है, एक खास परिस्थिति में जिंदा और जहरीले सांप को निगलता है। ये कोई आदत नहीं, बल्कि मजबूरी होती है, एक रहस्यमयी बीमारी की वजह से।

कौन-सी है ये रहस्यमयी बीमारी?

इस बीमारी को स्थानीय भाषा में 'हयाम' (Hyam) कहा जाता है। जब ऊंट इस बीमारी की चपेट में आता है तो उसमें सुस्ती, बुखार, सूजन, एनीमिया जैसे लक्षण दिखने लगते हैं और वो खाना-पीना बंद कर देता है। शरीर अकड़ने लगता है और ऊंट धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।

जहर से जहर का मुकाबला

इस बीमारी का कोई मेडिकल इलाज पारंपरिक रूप से नहीं है। लेकिन पीढ़ियों से ऊंट पालक एक विचित्र और खतरनाक तरीका अपनाते आ रहे हैं – ऊंट को जिंदा सांप, खासकर कोबरा, खिलाया जाता है। माना जाता है कि कोबरा के ज़हर से ऊंट के शरीर में मौजूद बीमारी का ज़हर खत्म हो जाता है।

कैसे कराते हैं ये अनोखा इलाज’?

ऊंट के मालिक पहले उसके मुंह को खोलते हैं, फिर जिंदा सांप को उसके मुंह में डालते हैं। इसके बाद ऊंट के गले में पानी डाला जाता है ताकि सांप सीधे उसके पेट में चला जाए। ये सुनकर डरावना जरूर लगता है, लेकिन कुछ जगहों पर इसे आज भी परंपरा की तरह अपनाया जाता है।

विज्ञान क्या कहता है?

वैज्ञानिक रूप से इस पद्धति की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोक मान्यताओं में इसका असर देखा गया है। ऊंट पालकों का मानना है कि इलाज के बाद ऊंट धीरे-धीरे सामान्य व्यवहार करने लगता है और उसके लक्षण कम हो जाते हैं।

जिंदगी बचाने के लिए जहर?

ऊंट का ये अनोखा और चौंकाने वाला व्यवहार उसे और भी खास बना देता है। जहां एक ओर ये जानवर रेगिस्तान में जीवन की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर ये दिखाता है कि कभी-कभी प्रकृति और परंपरा मिलकर कुछ ऐसे उपाय भी निकाल लेते हैं जो विज्ञान की समझ से परे हैं।

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