डायनासोरों का अंत करने वाला उल्कापिंड आखिर था कैसा? 6.6 करोड़ साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा

6.6 करोड़ साल पहले धरती से टकराए विशाल उल्कापिंड ने डायनासोरों के अस्तित्व को खत्म कर दिया था। अब वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष चट्टान की पहचान को लेकर बड़ा दावा किया है। नई रिसर्च के मुताबिक, यह दुर्बल CO कॉन्ड्राइट श्रेणी का एस्टेरॉयड हो सकता है, जिसने पृथ्वी का इतिहास बदल दिया

अपडेटेड Jul 20, 2026 पर 3:58 PM
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एस्टेरॉयड करीब 10 किलोमीटर चौड़ा था।

करीब 6.6 करोड़ साल पहले धरती से टकराने वाली एक विशाल अंतरिक्ष चट्टान ने जीवन की पूरी कहानी बदल दी थी। इस भयानक टक्कर को डायनासोरों के विनाश की सबसे बड़ी वजहों में से एक माना जाता है। लंबे समय से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर वह उल्कापिंड किस तरह का था, जिसने इतनी बड़ी तबाही मचाई। अब एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की है। वैज्ञानिकों ने चट्टानों में मौजूद खास रासायनिक संकेतों का अध्ययन कर दावा किया है कि यह एस्टेरॉयड संभवतः एक दुर्लभ CO कॉन्ड्राइट श्रेणी का था।

इस खोज से न सिर्फ पृथ्वी के पुराने इतिहास को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी पता चलेगा कि अंतरिक्ष की दुर्लभ चट्टानें ग्रहों और जीवन के विकास को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।

चट्टानों के छोटे-छोटे कणों ने खोला करोड़ों साल पुराना राज


वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए मैक्सिको के युकातान इलाके में मौजूद चिक्सुलूब क्रेटर से मिले मलबे की जांच की। उन्होंने इन चट्टानों में मौजूद बेहद छोटे रासायनिक संकेतों और निकेल आइसोटोप्स का अध्ययन किया। इन संकेतों से पता चला कि करोड़ों साल पहले धरती से टकराने वाला एस्टेरॉयड किस तरह की चट्टान से बना था। यह रिसर्च ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में की गई, जिसमें फ्रांस, बेल्जियम और ऑस्ट्रिया के शोधकर्ता भी शामिल थे।

10 किलोमीटर की चट्टान ने मचा दी थी भयानक तबाही

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एस्टेरॉयड करीब 10 किलोमीटर चौड़ा था। जब यह धरती से टकराया तो इतनी जबरदस्त ऊर्जा निकली कि भयंकर गर्मी, बड़े-बड़े भूकंप, जंगलों में आग और विशाल सुनामी जैसी घटनाएं हुईं। इस टक्कर से भारी मात्रा में धूल और गैसें वातावरण में फैल गईं, जिसने पूरी पृथ्वी के माहौल को बदल दिया।

धूल की परत ने रोक दी सूरज की रोशनी

उल्कापिंड की टक्कर के बाद वातावरण में फैली धूल इतनी ज्यादा थी कि सूरज की रोशनी धरती तक ठीक से नहीं पहुंच पाई। इससे तापमान तेजी से गिरा और जलवायु में बड़ा बदलाव आया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस घटना के कारण पृथ्वी की करीब 75 प्रतिशत प्रजातियां खत्म हो गईं। इनमें वे सभी डायनासोर भी शामिल थे, जो पक्षियों की श्रेणी में नहीं आते थे।

पहले सिर्फ अंदाजा था, अब मिली सटीक पहचान

वैज्ञानिकों को पहले से पता था कि डायनासोरों के खत्म होने के पीछे कार्बन से भरपूर एक खास तरह का एस्टेरॉयड जिम्मेदार हो सकता है। लेकिन वह किस श्रेणी का था, यह साफ नहीं था। नई रिसर्च से पता चला है कि यह संभवतः CO कॉन्ड्राइट था, जो धरती पर मिलने वाले उल्कापिंडों की तुलना में काफी दुर्लभ होता है।

भविष्य के अंतरिक्ष खतरों को समझने में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस उल्कापिंड की पहचान से यह समझने में मदद मिलेगी कि यह अंतरिक्ष में कहां बना था और ऐसी चट्टानें ग्रहों के इतिहास को कैसे प्रभावित करती हैं। यह जानकारी भविष्य में धरती के करीब आने वाले एस्टेरॉयड के खतरे को समझने और उनसे निपटने की तैयारी में भी मदद कर सकती है।

एक टक्कर जिसने बदल दी धरती पर जीवन की कहानी

चिक्सुलूब एस्टेरॉयड की टक्कर भले ही डायनासोरों के विनाश का कारण बनी, लेकिन इसके बाद पृथ्वी पर जीवन के विकास का नया दौर शुरू हुआ। इस घटना के बाद स्तनधारियों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खुला और धीरे-धीरे वे धरती पर प्रमुख जीवों में शामिल हो गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अंतरिक्ष चट्टान पृथ्वी के इतिहास का ऐसा मोड़ बनी, जिसने जीवन की पूरी दिशा बदल दी।

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