हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस डे पूरी दुनिया में खुशियों और उल्लास के साथ मनाया जाता है। ये ईसाइयों का सबसे खास पर्व माना जाता है, जो प्रभु यीशु मसीह के जन्म की याद में सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन घरों और सड़कों पर रंग-बिरंगी लाइटें सजाई जाती हैं, क्रिसमस ट्री लगाए जाते हैं और चर्चों में खास प्रार्थनाएं होती हैं। कैंडल जलाकर शांति और प्रेम का संदेश दिया जाता है, वहीं बच्चों के लिए ये दिन खास होता है, क्योंकि उन्हें Santa Claus से तोहफों की उम्मीद रहती है। मिठाइयों की खुशबू, जिंगल बेल्स की धुन और अपनों के साथ वक्त बिताने की खुशी इस त्योहार को और यादगार बना देती है।
लेकिन इन सारी रौनक के बीच एक बात अक्सर लोगों का ध्यान खींचती है। लोग Christmas को कई बार X-Mas क्यों लिखते हैं? क्या ये सिर्फ शॉर्ट फॉर्म है या इसके पीछे कोई खास वजह छिपी है? यही सवाल हर साल चर्चा में रहता है।
X-Mas कोई शॉर्टकट नहीं, छिपा है गहरा अर्थ
अक्सर लोग समझते हैं कि X-Mas, Christmas का छोटा रूप है, लेकिन असल में इसके पीछे इतिहास और धर्म से जुड़ी दिलचस्प कहानी है। यहां X कोई सामान्य अंग्रेजी अक्षर नहीं, बल्कि ग्रीक भाषा के एक खास अक्षर से जुड़ा है।
ग्रीक भाषा से जुड़ा है X का रहस्य
ग्रीक भाषा में ‘ची’ नाम का एक अक्षर होता है, जिसका उच्चारण ‘की’ किया जाता है और इसका आकार अंग्रेजी के X जैसा होता है। खास बात ये है कि ग्रीक भाषा में Christ शब्द की शुरुआत इसी ‘ची’ अक्षर से होती है। इसी वजह से X को ईसा मसीह का प्रतीक माना जाने लगा।
X-Mas का असली मतलब क्या है?
X का मतलब Christ यानी यीशु मसीह, Mas का मतलब Mass यानी धार्मिक समारोह
इस तरह X-Mas का शाब्दिक अर्थ हुआ—क्राइस्ट का पर्व, जो पूरी तरह Christmas के अर्थ से मेल खाता है।
कैसे शुरू हुआ X-Mas लिखने का चलन?
मध्यकाल में जब सब कुछ हाथ से लिखा जाता था, तब लंबे शब्दों को छोटा लिखने की जरूरत महसूस हुई। धर्मग्रंथ लिखने वाले लोग बार-बार Christ लिखने की बजाय उसके प्रतीक X का इस्तेमाल करने लगे। 11वीं शताब्दी तक आते-आते Xmas लिखना आम हो गया। बाद में प्रिंटिंग प्रेस के दौर में भी जगह बचाने के लिए इसी शॉर्ट फॉर्म का ज्यादा इस्तेमाल होने लगा।
क्रिसमस ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि माता मरियम ने 25 दिसंबर को बेथलहम में यीशु को जन्म दिया था। 336 ईस्वी के आसपास सम्राट कॉन्स्टेंटाइन के शासनकाल में इसे एक बड़े धार्मिक पर्व के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।