दिल्ली में बंदर की खोपड़ी लेकर फ्लाइट पर चढ़ने की तैयारी में था ये शख्स! जब पकड़ा गया तो ये सब पता चला

दिल्ली एयरपोर्ट पर हैदराबाद जाने की तैयारी कर रहे एक यात्री के हैंडबैग से ऐसी चीज मिली, जिसने सुरक्षा कर्मियों को हैरान कर दिया। जांच के दौरान बैग में बंदर की खोपड़ी बरामद हुई। CISF ने तुरंत यात्री को रोक लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया

अपडेटेड Aug 12, 2026 पर 1:13 PM
यात्री विमान तक पहुंच पाता, उससे पहले ही सुरक्षा जांच में बैग से संदिग्ध वस्तु बरामद हो गई।

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के हैंडबैग से ऐसी चीज बरामद हुई, जिसे देखकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी चौंक गए। यात्री हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में था, लेकिन विमान तक पहुंचने से पहले ही उसकी यात्रा रुक गई। नियमित जांच के दौरान उसके बैग के अंदर एक खोपड़ी मिली। पूछताछ में यात्री ने इसे बंदर की खोपड़ी बताया। मामला सिर्फ एयरपोर्ट सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, क्योंकि वन्यजीवों के अवशेषों को लेकर कानून में कई प्रावधान हैं।

CISF ने संदिग्ध वस्तु को कब्जे में लेकर यात्री को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर यात्री इस खोपड़ी को अपने साथ क्यों ले जा रहा था और क्या इसे विमान में ले जाना कानूनी था? मामले की जांच के साथ इन सवालों के जवाब भी तलाशे जा रहे हैं।

हैंडबैग की जांच में मिला अजीब सामान


CISF के मुताबिक, IGI एयरपोर्ट पर विमान में सवार होने से पहले यात्रियों की सुरक्षा जांच चल रही थी। इसी दौरान एक यात्री के हैंडबैग की तलाशी ली गई। जांच के दौरान बैग के अंदर एक खोपड़ी दिखाई दी। पूछताछ करने पर यात्री ने कथित तौर पर बताया कि यह बंदर की खोपड़ी है। मामला संदिग्ध लगने पर CISF ने यात्री को आगे जाने से रोक दिया।

वन्यजीव कानून के तहत हुई कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, बरामद वस्तु के वन्यजीव से जुड़े होने की आशंका को देखते हुए मामले को गंभीरता से लिया गया। यात्री को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया।यह कार्रवाई वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत की गई है। मामले में खोपड़ी वास्तव में किस प्रजाति के बंदर की है और उसे यात्री अपने साथ क्यों ले जा रहा था, इसकी जांच की जा रही है।

बंदर की खोपड़ी का आखिर इस्तेमाल कहां होता है?

बंदर की खोपड़ी कई क्षेत्रों में अलग-अलग उद्देश्यों से जुड़ी रही है। वैज्ञानिक और मेडिकल क्षेत्र में प्राइमेट्स की हड्डियों का इस्तेमाल शारीरिक संरचना और एनाटॉमी के अध्ययन में किया जा सकता है।कुछ जगहों पर जानवरों की खोपड़ियों को पारंपरिक मान्यताओं या तंत्र-मंत्र से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, ऐसे इस्तेमाल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माने जाते।

इंसानी खोपड़ी से क्यों की जाती है तुलना?

बंदरों और इंसानों की शारीरिक संरचना में कई समानताएं होने के कारण प्राइमेट्स का अध्ययन वैज्ञानिक शोध में महत्वपूर्ण रहा है। खासतौर पर खोपड़ी और कंकाल की संरचना का अध्ययन शरीर रचना को समझने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी वन्यजीव के अवशेष को रखना, खरीदना या एक जगह से दूसरी जगह ले जाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित या नियंत्रित हो सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में संबंधित वन्यजीव कानून लागू होते हैं।

CISF की सतर्कता से पकड़ा गया मामला

यात्री विमान तक पहुंच पाता, उससे पहले ही सुरक्षा जांच में बैग से संदिग्ध वस्तु बरामद हो गई। इस घटना ने एक बार फिर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच की अहमियत को सामने ला दिया है। साथ ही यह भी दिखाता है कि वन्यजीवों से जुड़े अवशेषों को लेकर कानून कितने गंभीर हैं।

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