Delhi News : हरियाणा के करनाल से दिल्ली के हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट तक जाने वाली मुनक नहर लगभग 100 किलोमीटर लंबी है। इस नहर को राजधानी दिल्ली में पानी पहुंचाने के लिए एक अहम जरिया बनाया गया था। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस नहर को एक डरावना नाम मिल गया है – “खूनी नहर”। एक समय लोगों की ज़िंदगी बचाने वाली यह नहर अब मौत की जगह बनती जा रही है। खासकर बवाना क्षेत्र के पास रहने वाले लोग इस नहर के बारे में डर के साथ बात करते हैं। इसी इलाके में, जिसे आमतौर पर बवाना नहर कहा जाता है, अक्सर ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं जो दिल्ली के सबसे डरावने रहस्यों में गिनी जाती हैं।
मुनक नहर से ऐसी डरावनी चीज़ें मिलती हैं जिन्हें देखकर रूह कांप जाए, जैसे कि सड़े-गले, कटे-फटे और पहचान में न आने वाले शव। अब ये घटनाएं इतनी आम हो गई हैं कि इस महीने की शुरुआत में जब एक सिर, हाथ और पैर से रहित लाश मिली, तो किसी को ज़्यादा हैरानी नहीं हुई। दरअसल, यह इस साल मुनक नहर से मिलने वाला दसवां शव था। जनवरी 2022 से 27 अप्रैल 2025 तक, इस नहर से कम से कम 91 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसका मतलब है कि हर साल औसतन 30 और हर महीने दो से ज़्यादा लाशें इस नहर से निकल रही हैं।
सबसे हालिया घटना दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 13 स्थित हैदरपुर जल संयंत्र की है, जहां एक कर्मचारी ने देर शाम फिल्टर की जाली में कुछ फंसा हुआ देखा। जब उसने पास जाकर देखा, तो पता चला कि वह एक इंसान का बुरी तरह कटा-फटा शरीर था, जिसमें सिर और अंग नहीं थे। हैरानी की बात यह रही कि इस खौफनाक खोज के बावजूद वहाँ कोई घबराहट या अफरा-तफरी नहीं मची।इन घटनाओं के लेकर वहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि, "अब यह आम बात हो गई है।" यह एक दर्दनाक सच्चाई है कि जिस जगह को शहर का पीने का पानी साफ करने के लिए बनाया गया था, वहीं अब अकसर सबसे डरावनी सच्चाइयां सामने आती हैं।
बता दें कि मुनक नहर दो हिस्सों में बंटी हुई है – एक है सीमेंट से बनी सीएलसी लाइन और दूसरी बिना पक्की डीएसबी लाइन। दोनों ही रास्ते हरियाणा से होकर दिल्ली में दाखिल होते हैं। यह नहर अपने लंबे और खुले रास्ते के कारण अपराधियों के लिए लाशें या सबूत छिपाने की आसान जगह बन गई है। केएन काटजू मार्ग थाने के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने माना, "यहां न तो कोई सीसीटीवी कैमरा है, न ही गश्त और न ही ऐसा कोई सिस्टम जो फेंकी गई चीजों का पता लगा सके।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "चाहे हथियार हों, गाड़ियां या फिर लाशें – सबका अंजाम इसी नहर में होता है।"
दिल्ली पुलिस का कहना है कि कई हत्या के मामलों में अपराधी सबूत मिटाने के लिए मुनक नहर का इस्तेमाल करते हैं। वे शव और हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार नहर में फेंक देते हैं। कभी-कभी तो गाड़ियाँ भी इसमें डाली जाती हैं। रोहिणी के डीसीपी अमित गोयल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर महीने पुलिस को इस नहर से दो से तीन अज्ञात शव मिलने की खबर मिलती है।
ऐसे मामलों में शव की पहचान करना, परिवार को सूचित करना और अंतिम संस्कार करवाना – जब कोई आगे नहीं आता तो पुलिस के लिए ये काम काफी थकान वाला काम बन जाता है। कई बार मृतकों की पहचान करना बहुत मुश्किल होता है और ज़्यादातर मामलों में पहचान हो ही नहीं पाती। पिछले तीन सालों में नहर से मिले 91 शवों में से सिर्फ 28 की ही पहचान हो सकी है।हाल ही में पहचान हुआ एक शव 27 साल के अनूप का था। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट इस साल होली के बाद बवाना थाने में दर्ज हुई थी। 23 अप्रैल को उनका शव नहर से मिला। उनके कपड़ों में मिले दो आधार कार्ड की मदद से पुलिस उनके परिवार तक पहुंच सकी।