26,600 की कमाई पर 26,300 टैक्स! 'मेरे पास अब सिर्फ 300 रुपये बचे हैं' महिला की कहानी वायरल

अपडेटेड Aug 03, 2026 पर 4:28 PM
प्रियाल की रील तेजी से वायरल हुई और कई लोगों ने कमेंट कर अपनी परेशानियां साझा कीं।

दिल्ली की एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट ने टैक्स को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। इंस्टाग्राम यूजर प्रियाल पाल ने बताया कि नौकरी की सैलरी के अलावा उन्हें डिविडेंड और ब्याज से ₹26,600 की अतिरिक्त कमाई हुई। लेकिन रिटर्न भरते समय इस छोटी-सी कमाई पर टैक्स और ब्याज मिलाकर करीब ₹26,300 देने की बात सामने आई। उन्होंने इसे मजेदार अंदाज में फिल्म लगान के डायलॉग से जोड़कर शेयर किया। उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद कई नौकरीपेशा लोगों ने भी अपनी टैक्स से जुड़ी परेशानियां और अनुभव साझा किए।

सैलरी के अलावा हुई थी अतिरिक्त कमाई

प्रियाल ने बताया कि उनकी नौकरी की सैलरी से पूरे साल HR पहले ही टैक्स काट रहा था। इसके अलावा उन्होंने शेयरों से मिले डिविडेंड और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज से करीब ₹26,600 कमाए। इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय उन्हें पता चला कि यह अतिरिक्त आय "Income from Other Sources" में जुड़ गई, जिससे उनकी कुल टैक्सेबल इनकम बढ़ गई।


₹26,600 की कमाई पर इतना बोझ कैसे आया?

प्रियाल के अनुसार, इस अतिरिक्त आय की वजह से उनकी करीब ₹24,000 की अतिरिक्त टैक्स देनदारी बन गई। इसके अलावा टैक्स भुगतान में देरी के कारण लगभग ₹2,000 का ब्याज भी जुड़ गया। इस तरह कुल मिलाकर करीब ₹26,300 का भुगतान करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त कमाई में से उनके पास सिर्फ लगभग ₹300 ही बचे।

वीडियो वायरल, लोगों ने शेयर किए अपने अनुभव

प्रियाल की रील तेजी से वायरल हुई और कई लोगों ने कमेंट कर अपनी परेशानियां साझा कीं। कुछ यूजर्स ने कहा कि सैलरी पाने वाले लोगों पर टैक्स का बोझ ज्यादा महसूस होता है क्योंकि उनकी आय का हिसाब आसानी से ट्रैक किया जाता है। एक यूजर ने लिखा कि कई लोग साल के कुछ महीने सिर्फ टैक्स भरने के लिए काम करते हुए महसूस करते हैं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि कमाई, बचत और खर्च- तीनों स्तरों पर टैक्स का असर दिखाई देता है।

लोगों ने गिनाए टैक्स के कई स्तर

कुछ यूजर्स ने टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यक्ति कमाता है तो इनकम टैक्स देता है, बैंक में पैसे रखने पर ब्याज से जुड़ी आय पर टैक्स लगता है और खर्च करने पर GST जैसे अप्रत्यक्ष टैक्स भी देने पड़ते हैं। कई लोगों का कहना था कि मध्यम वर्ग के लिए टैक्स का असर इसलिए ज्यादा महसूस होता है क्योंकि उनके पास टैक्स बचाने के सीमित विकल्प होते हैं।

सैलरी क्लास के टैक्स बोझ पर पुरानी बहस

प्रियाल की पोस्ट ऐसे समय में सामने आई है जब इनकम टैक्स रिटर्न भरने के दौरान सोशल मीडिया पर टैक्स को लेकर चर्चाएं बढ़ जाती हैं। कई वेतनभोगी लोग अपनी टैक्स देनदारी साझा करते हुए सवाल उठाते हैं कि उन्हें भुगतान के बदले कितनी सुविधाएं मिल रही हैं। इससे पहले भी कई लोगों ने करोड़ों रुपये टैक्स देने के बाद अपनी राय सोशल मीडिया पर रखी है और टैक्स व्यवस्था पर बहस छेड़ी है।

टैक्स को लेकर जारी है बहस

प्रियाल पाल की पोस्ट ने एक बार फिर सैलरी क्लास की उस चिंता को सामने ला दिया है जिसमें लोग टैक्स भुगतान, बचत और खर्च के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, टैक्स व्यवस्था के समर्थक इसे देश के विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए जरूरी योगदान भी मानते हैं।

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