क्या आप जानते हैं LPG, CNG और PNG का फर्क? यहां समझें आसान भाषा में

Interesting Facts: इन दिनों सोशल मीडिया पर LPG, CNG और PNG को लेकर लोगों की जिज्ञासा तेजी से बढ़ रही है। कई यूजर्स इन गैसों से जुड़ी जानकारी खोज रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों में क्या अंतर होता है? आइए जानते हैं इनके उपयोग और खासियतों से जुड़ी दिलचस्प बातें

अपडेटेड Mar 15, 2026 पर 10:22 AM
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Interesting Facts: CNG मुख्य रूप से वाहनों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है

मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस, पेट्रोलियम और अन्य ईंधन से जुड़ी आपूर्ति को लेकर कई देशों में चिंता बढ़ गई है। कुछ जगहों पर गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, तो वहीं कहीं लोगों द्वारा अचानक ज्यादा बुकिंग करने के कारण सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे हालात में कई देश ऊर्जा बचाने और जरूरत के अनुसार वितरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया और खबरों में LPG, CNG और PNG जैसे शब्द लगातार चर्चा में हैं। हालांकि इन तीनों गैसों का इस्तेमाल आम जिंदगी में होता है, लेकिन बहुत से लोग इनके बीच का अंतर ठीक से नहीं जानते।

दरअसल इनकी संरचना, उपयोग और सप्लाई का तरीका अलग-अलग होता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर LPG, CNG और PNG एक-दूसरे से कैसे अलग हैं और किस काम में ज्यादा इस्तेमाल होते हैं।

LPG, CNG और PNG क्या होती हैं?


LPG, CNG और PNG तीनों ही हाइड्रोकार्बन गैसें हैं, लेकिन इनकी संरचना, उपयोग और सप्लाई का तरीका अलग-अलग होता है।

LPG (Liquefied Petroleum Gas) प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, जो क्रूड ऑयल की रिफाइनिंग या नेचुरल गैस प्रोसेसिंग से मिलती है।

वहीं CNG (Compressed Natural Gas) मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है, जिसे बहुत अधिक दबाव में संकुचित करके रखा जाता है।

इसके अलावा PNG (Piped Natural Gas) भी प्राकृतिक गैस ही होती है, जिसमें मीथेन की मात्रा ज्यादा रहती है और इसे पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जाता है।

स्टोरेज और सप्लाई में क्या है अंतर

इन तीनों गैसों के स्टोरेज और सप्लाई का तरीका भी काफी अलग होता है।

LPG को सिलेंडर में तरल रूप में स्टोर किया जाता है। दबाव के कारण यह लिक्विड बन जाती है और इस्तेमाल के समय गैस में बदल जाती है। यही वजह है कि यह लाल रंग के सिलेंडर में घर-घर पहुंचती है।

CNG हमेशा गैस के रूप में ही रहती है और इसे बहुत अधिक दबाव में सिलेंडर में भरा जाता है। यह तरल रूप में नहीं बदलती।

PNG को किसी सिलेंडर में भरने की जरूरत नहीं होती। इसे पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों, दुकानों और उद्योगों तक पहुंचाया जाता है।

अलग-अलग कामों में होता है इस्तेमाल

इन तीनों गैसों का इस्तेमाल भी अलग-अलग क्षेत्रों में किया जाता है।

LPG का सबसे ज्यादा उपयोग घरेलू किचन में खाना बनाने, पानी गर्म करने और कुछ वाहनों में ईंधन के रूप में होता है। भारत में इसके करोड़ों कनेक्शन हैं।

CNG मुख्य रूप से वाहनों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है, जैसे ऑटो, टैक्सी, कार और बसें। यह पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ती और कम प्रदूषण फैलाने वाली मानी जाती है।

PNG का उपयोग घरों में कुकिंग, हीटिंग और कई इंडस्ट्रियल कामों में किया जाता है। शहरों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

उपलब्धता और सुविधा में फर्क

जहां LPG सब्सिडी के कारण अपेक्षाकृत सस्ती पड़ती है, वहीं इसमें सिलेंडर खत्म होने और रिफिल कराने की परेशानी रहती है।

CNG वाहनों के लिए किफायती ईंधन है, लेकिन कई शहरों में इसे भरवाने के लिए लंबी कतारें लगती हैं।

वहीं PNG की सबसे बड़ी खासियत इसकी लगातार सप्लाई है। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं इलाकों में मिलती है जहां पाइपलाइन नेटवर्क मौजूद है।

इसलिए अगली बार जब आप गैस सिलेंडर बदलें या वाहन में CNG भरवाएं, तो इन तीनों गैसों के बीच का अंतर जरूर याद रखें।

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