1.25 लाख की डॉक्टर वाली नौकरी छोड़ी, 45 दिनों में कमाए 2 लाख रुपये, डॉ. चारुल सिंह की कहानी हैरान कर देगी

डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के बाद भी कुछ लोग अपनी जिंदगी में नए रास्ते तलाशते हैं। डॉ. चारुल सिंह ने भी मेडिकल करियर के बाद डिजिटल बिजनेस की दुनिया में कदम रखा। उनकी कहानी दिखाती है कि बदलाव, मेहनत और सही फैसलों के दम पर कोई भी व्यक्ति अपने लिए सफलता की नई राह बना सकता है

अपडेटेड Jul 27, 2026 पर 9:41 AM
चारुल ने प्राइवेट कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई पूरी की थी।

डॉक्टर बनना कई युवाओं का सपना होता है, लेकिन कुछ लोग सफलता की एक तय राह छोड़कर अपनी जिंदगी में नया रास्ता चुनने का साहस दिखाते हैं। डॉ. चारुल सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मेडिकल क्षेत्र में अच्छी पहचान बनाने के बाद उन्होंने अपने करियर को एक अलग दिशा देने का फैसला किया। एक समय अस्पतालों में सेवाएं देने वाली चारुल ने बदलती परिस्थितियों के बीच डिजिटल दुनिया में कदम रखा और यहां भी सफलता हासिल की। उनका सफर सिर्फ करियर बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने, नए अवसर तलाशने और अपने लिए बेहतर संतुलन बनाने की प्रेरणा देता है। पढ़ाई, नौकरी, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने जिस तरह अपने फैसले लिए, वह कई लोगों के लिए सीख बन गया है।

45 दिनों में कमाए पहले ₹2 लाख

डॉ. चारुल ने अपनी डिजिटल यात्रा शुरू करने के सिर्फ 45 दिनों के अंदर ₹2 लाख की कमाई कर ली। हालांकि, उनका यह फैसला सिर्फ पैसे के लिए नहीं था। इसके पीछे कई सालों की पढ़ाई, अस्पताल की लंबी ड्यूटी, मां बनने की जिम्मेदारियां, कानूनी लड़ाई और आर्मी अधिकारी पति के साथ बदलती परिस्थितियों का अनुभव था।


BDS के बाद शुरू हुआ असली संघर्ष

चारुल ने प्राइवेट कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई पूरी की थी। उन्हें उम्मीद थी कि मेडिकल क्षेत्र में कदम रखते ही आर्थिक स्थिरता मिल जाएगी, लेकिन नौकरी की शुरुआत में उन्हें हकीकत का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि इतने सालों की पढ़ाई और परिवार के खर्च के मुकाबले शुरुआती नौकरी में मिलने वाली सैलरी काफी कम थी। यही वह समय था जब उन्होंने अपने करियर को लेकर नए सिरे से सोचना शुरू किया।

परिवार और समाज की उम्मीदों के बीच बनाई अपनी राह

परंपरागत परिवार से आने वाली चारुल पर बड़ी बेटी होने की जिम्मेदारियां भी थीं। उम्र बढ़ने के साथ परिवार में करियर से ज्यादा शादी की बातें होने लगी थीं। लेकिन उन्होंने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।

दिल्ली के बड़े अस्पतालों में हासिल किया अनुभव

चारुल ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज में नॉन-PG जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में सेवाएं दीं। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने NEET-PG परीक्षा पास की और लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री में मास्टर्स किया।

मेहनत का मिला फल, सैलरी पहुंची ₹1.25 लाख तक

अपने मेडिकल करियर में चारुल ने लंबा सफर तय किया। जूनियर रेजिडेंट के तौर पर उनकी शुरुआती सैलरी करीब ₹92 हजार प्रति माह थी। मास्टर्स के दौरान यह लगभग ₹1 लाख तक पहुंच गई और सीनियर रेजिडेंट बनने के बाद उनकी कमाई करीब ₹1.25 लाख प्रति माह हो गई।

शादी, मां बनने और नौकरी के बीच बड़ी चुनौती

मेडिकल करियर आगे बढ़ रहा था, तभी निजी जिंदगी में नई जिम्मेदारियां आईं। चारुल ने एक भारतीय सेना अधिकारी से शादी की। पति की अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग के कारण दोनों को कई शहरों में रहना पड़ा।

मां बनने के दौरान भी उन्होंने अस्पताल की लंबी शिफ्ट पूरी की और नवजात बच्चे की देखभाल के साथ अपनी मेडिकल जिम्मेदारियां निभाईं।

मातृत्व अवकाश के लिए लड़ी कानूनी लड़ाई

सीनियर रेजिडेंसी के दौरान चारुल को बॉन्डेड डॉक्टरों के लिए मैटरनिटी लीव से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कानूनी लड़ाई जीत हासिल की।

इस अनुभव ने उनकी सोच बदल दी। उन्हें एहसास हुआ कि खुद का कुछ बनाना और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना कितना जरूरी है।

मेडिकल करियर से डिजिटल बिजनेस तक का सफर

पति की लगातार आर्मी पोस्टिंग और दूर-दराज इलाकों में रहने की वजह से चारुल के लिए नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस जारी रखना मुश्किल हो गया। इसके बाद उन्होंने करीब छह महीने तक डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिजनेस को समझा।

जून 2025 में उन्होंने अपना डिजिटल वेंचर शुरू किया, जिसकी शुरुआत पर्सनल ब्रांडिंग और स्टोरीटेलिंग से हुई।

अब डॉक्टर से बनीं डिजिटल मेंटर

धीरे-धीरे क्लाइंट मिलने लगे और उनका ऑनलाइन काम बढ़ता गया। चारुल ने बताया कि डिजिटल बिजनेस से उनकी कमाई अब उनकी पुरानी डॉक्टर वाली सैलरी से भी आगे निकल चुकी है।

आज वह Charul’s Inner Circle के जरिए लोगों, खासकर महिलाओं और शुरुआती स्तर के लोगों को डिजिटल स्किल्स और पर्सनल ब्रांडिंग सिखा रही हैं।

महिलाओं को दिया खास संदेश

डॉ. चारुल का मानना है कि मां बनने के बाद महिलाओं के सपने खत्म नहीं होते, बल्कि उनकी सोच और लक्ष्य बदल सकते हैं। उनका कहना है कि अवसरों का इंतजार करने के बजाय खुद के लिए नए रास्ते बनाने चाहिए। उनकी कहानी दिखाती है कि सही समय पर लिया गया बदलाव जिंदगी की नई शुरुआत बन सकता है।

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