प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले हर शख्स के लिए छंटनी यानी Layoff एक बुरे सपने जैसा है। इंडिविजुअल के लिए जॉब के दौरान सोशल सिक्यॉरिटी नहीं होने के इस खतरे से हर शख्स परेशान रहता है। इसे लेकर इंडस्ट्री से भी तमाम तरह की खबरें आती रहती हैं। ऐसा ही एक और केस सामने आया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मनी कंट्रोल इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में एक कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयी ने रेडिट पर अपने साथ हुई एक चौंकाने वाली घटना शेयर की है। कर्मचारी के मुताबिक वह पिछले कुछ महीनों से पेंडिंग अपनी सैलरी हाइक को लेकर मैनेजर के साथ डिस्कशन करने वाला था, लेकिन मीटिंग में उसे बताया गया कि उसे अब नौकरी से निकाला जा रहा है।
'हाइक के लिए कॉल किया था, मिल गया इस्तीफा'
कर्मचारी ने रेडिट पोस्ट में अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि अभी-अभी ले-ऑफ (Layoff) का शिकार हुआ हूं। मेरी हाइक पिछले कुछ महीनों से पेंडिंग थी, जिस पर चर्चा के लिए मैंने अपने मैनेजर को कॉल किया था। मेरी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा जब मुझसे इस्तीफा देने और कहीं और अवसर तलाशने के लिए कह दिया गया।
कर्मचारी के मुताबिक वह एक बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी के साथ अपनी पैरेंट कंपनी के जरिए कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम कर रहा था। कर्मचारी के अनुसार, कॉल के दौरान कंपनी ने इस छंटनी के पीछे लागत से जुड़ी वजह बताई। पोस्ट में लिखा है कि मुझे आज बताया गया कि वह बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी मेरी पैरेंट कंपनी को उससे कम भुगतान कर रही है, जितना कि पैरेंट कंपनी मुझे सैलरी दे रही है। यही कारण है कि वे चाहते हैं कि मैं इस्तीफा दे दूं।
सेवरेंस पे (Severance Pay) को लेकर उलझन
कर्मचारी ने बताया कि वह अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं देना चाहता और इसके बदले 'सेवरेंस पैकेज' की मांग कर रहा है। उसने ऑनलाइन कम्युनिटी से सलाह मांगते हुए पूछा कि मैं इस्तीफा नहीं देना चाहता और मुझे सेवरेंस पे चाहिए। क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे मैं यह सुनिश्चित कर सकूं?
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी राय और सलाह दी है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि इस्तीफा मत दो। उनसे कहो कि आगे की सारी बातचीत ईमेल पर करें। साथ ही अपना ऑफर लेटर और शर्तें दोबारा पढ़ें ताकि वे आपके साथ कुछ गलत न कर सकें। एक दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के पास टर्मिनेशन और सेवरेंस पे को लेकर ज्यादा अधिकार नहीं होते हैं, जब तक कि उन्हें पैरेंट कंपनी से न निकाला जाए।
कॉन्ट्रैक्ट पर रखने का मुख्य कारण ही यही होता है कि इंश्योरेंस, सेवरेंस और ईपीएफ का पैसा न देना पड़े। एक यूजर ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि मेरे साथ भी इसी महीने ऐसा हुआ। अब घर बैठकर इंटरव्यू की तैयारी कर रहा हूं। मुझे 6 महीने का बेसिक सेवरेंस मिला, जो करीब 3 महीने की सैलरी के बराबर है। इस घटना ने एक बार फिर से कॉन्ट्रैक्ट वर्कर की जॉब सिक्योरिटी और कंपनियों के काम करने के तरीकों पर बहस छेड़ दी है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट रेडिट पर साझा की गई यूजर-जनरेटेड सामग्री पर आधारित है। Moneycontrol.com इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।