दोनों भौंहों के बीच वाली जगह को कहते हैं क्या? ज्यादातर लोग नहीं जानते इसका सही नाम

क्या आप जानते हैं कि दोनों भौंहों के बीच मौजूद छोटी सी जगह का भी एक खास नाम है? इसे ‘ग्लैबेला’ (Glabella) कहा जाता है। चेहरे का यह छोटा हिस्सा सिर्फ दिखने में ही खास नहीं है, बल्कि हमारे भाव-भंगिमाओं में भी भूमिका निभाता है। गुस्सा, चिंता या ध्यान लगाने पर यहां की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं

अपडेटेड Aug 13, 2026 पर 4:46 PM
ग्लैबेला का आकार और उभार हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता।

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी दोनों भौंहों के बीच मौजूद छोटी सी जगह का भी कोई खास नाम होगा? शायद नहीं। चेहरे का यह छोटा सा हिस्सा, जो नाक के ऊपरी हिस्से और माथे के बीच दिखाई देता है, ‘ग्लैबेला’ (Glabella) कहलाता है। आम नजर में भले ही यह जगह खास न लगे, लेकिन चेहरे की बनावट और भाव-भंगिमाओं में इसकी अहम भूमिका होती है। जब हम गुस्सा होते हैं, किसी बात पर ध्यान लगाते हैं या चिंता में होते हैं, तो इसी हिस्से के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। यही वजह है कि यहां समय के साथ छोटी-छोटी लाइनें भी नजर आने लगती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि ग्लैबेला का इस्तेमाल सिर्फ चेहरे के इस हिस्से को बताने के लिए नहीं होता, बल्कि मेडिकल साइंस और शरीर रचना विज्ञान में भी यह एक महत्वपूर्ण पहचान बिंदु माना जाता है। इसका आकार हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

क्या होती है ग्लैबेला?


ग्लैबेला वह चिकना हिस्सा है, जो दोनों भौंहों के बीच और माथे के नीचे दिखाई देता है। यह देखने में भले ही छोटा और सामान्य लगे, लेकिन चेहरे की बनावट में इसका अपना महत्व है। इसके नीचे मौजूद मांसपेशियां चेहरे की कई गतिविधियों में मदद करती हैं।

गुस्सा या चिंता में क्यों दिखती हैं लाइनें?

जब हम गुस्सा करते हैं, किसी बात पर ध्यान लगाते हैं या चिंता में होते हैं, तो भौंहों के बीच की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं। इसी वजह से इस हिस्से में खड़ी लाइनें नजर आने लगती हैं। इन्हें आमतौर पर फ्राउन लाइन्स या ‘11 लाइन्स’ कहा जाता है, क्योंकि ये कई बार अंग्रेजी के अंक 11 जैसी दिखाई देती हैं।

चेहरे के एक्सप्रेशन में भी है भूमिका

ग्लैबेला चेहरे के भावों को दिखाने में भी मदद करती है। इसके आसपास की मांसपेशियों की हलचल से गुस्सा, चिंता, एकाग्रता और हैरानी जैसे भाव चेहरे पर दिखाई दे सकते हैं। यानी चेहरे का यह छोटा सा हिस्सा हमारी भावनाओं को जाहिर करने में भी योगदान देता है।

नाम कहां से आया?

‘ग्लैबेला’ शब्द की जड़ लैटिन भाषा में है। यह ‘glaber’ शब्द से जुड़ा है, जिसका अर्थ चिकना या smooth होता है। यह सिर्फ आम बातचीत में इस्तेमाल होने वाला नाम नहीं है। मेडिकल साइंस, शरीर रचना विज्ञान और एंथ्रोपोलॉजी में भी ग्लैबेला को चेहरे के एक महत्वपूर्ण anatomical reference point के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

हर व्यक्ति में अलग दिख सकती है

ग्लैबेला का आकार और उभार हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। जेनेटिक्स, चेहरे की बनावट और उम्र जैसे कई कारण इस हिस्से की शक्ल को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अगली बार जब आप आईने में अपनी भौंहों के बीच की जगह देखें, तो याद रखिए चेहरे के इस छोटे से हिस्से का भी एक बाकायदा नाम है, ग्लैबेला।

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